पाकिस्तान में बलूचिस्तान के हालात: मौलाना फजलुर रहमान का बयान
पाकिस्तान के नेता मौलाना फजलुर रहमान ने बलूचिस्तान के हालात पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने सेना और सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि 80% क्षेत्र अब उनके नियंत्रण से बाहर जा चुका है। बलूचिस्तान में पानी की कमी, जबरन गायब होने की घटनाएं और बढ़ती हिंसा के कारण लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जानिए इस मुद्दे पर मौलाना के बयानों और बलूचिस्तान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बारे में।
Jul 17, 2026, 19:14 IST
पाकिस्तान की सेना और सरकार के खिलाफ मौलाना फजलुर रहमान का विरोध
पाकिस्तान के प्रमुख नेता मौलाना फजलुर रहमान वर्तमान में पाकिस्तान की सेना और सरकार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आवाज बन गए हैं। उन्होंने हाल ही में कहा है कि सेना देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रही है। रहमान ने सेना से सवाल किया है कि यदि उन्हें सत्ता में रुचि है, तो उन्हें अपनी वर्दी उतारकर चुनाव में भाग लेना चाहिए। उन्होंने बलूचिस्तान के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि 80% क्षेत्र अब उनके नियंत्रण से बाहर जा चुका है। यह बयान बलूचिस्तान के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण स्वीकार्यता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी इस विषय पर कई दावे सामने आ रहे हैं, जो पहले बलूचिस्तान समर्थकों द्वारा उठाए गए थे। अब मौलाना फजलुर रहमान भी इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाते नजर आ रहे हैं।
बलूचिस्तान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन
मीर यार बलोच, जो खुद को बलूचिस्तान समर्थक और पत्रकार बताते हैं, ने यह घोषणा की है कि बलूचिस्तान अब स्वतंत्र हो चुका है और वहां के 80% क्षेत्र पर उनका कब्जा है। इस वीडियो में बलूचिस्तान की स्थिति पर चर्चा की जाएगी, जहां पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ कई मोर्चों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पानी की गंभीर कमी, जबरन गायब होने की घटनाएं और बढ़ती हिंसा के कारण लोग सड़कों पर उतर आए हैं। बलोच यख जिहाती कमेटी के तहत लापता लोगों के परिजन अपने रिश्तेदारों की वापसी की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, बलूच लिबरेशन आर्मी और बलूच लिबरेशन फ्रंट जैसे सशस्त्र समूह भी पाकिस्तान की सेना के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पाकिस्तान के लिए संवेदनशील बलूचिस्तान
बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग कर रहा है और यह क्षेत्र पाकिस्तान के लिए अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। यहां की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में काफी बिगड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब पाकिस्तान सरकार का नियंत्रण केवल बड़े शहरों तक सीमित रह गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सशस्त्र समूहों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बलूच विद्रोही लगातार सैन्य काफिलों और सुरक्षा ढांचे पर हमले कर रहे हैं, जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा, चीन के निवेश परियोजनाओं पर भी खतरा मंडरा रहा है।