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पाकिस्तान में शांति वार्ता के लिए शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की नोबेल पुरस्कार की मांग

पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की प्रशंसा हो रही है। इन दोनों नेताओं के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग उठाई गई है, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका को मान्यता मिल रही है। खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें इनकी भूमिका की सराहना की गई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना कम है।
 

पाकिस्तान में शांति वार्ता की हलचल

पाकिस्तान में हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका और ईरान ने संकेत दिए हैं कि वे इस्लामाबाद में होने वाली नई युद्धविराम वार्ता में भाग लेंगे। यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों ने सार्वजनिक रूप से वार्ता की तारीख की पुष्टि नहीं की है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने यह भी कहा है कि उनके किसी अधिकारी का पाकिस्तान में पहले से मौजूद होना सही नहीं है।


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की प्रशंसा की जा रही है, क्योंकि उनके प्रयासों के चलते अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की संभावना बढ़ी है। पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर इन दोनों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग उठ रही है। जब यह खबर आई, तो पाकिस्तान में खुशी का माहौल बन गया। टीवी डिबेट्स में इसे पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया गया। सभी पैनलिस्टों ने कहा कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर इस पुरस्कार के सबसे योग्य उम्मीदवार हैं।


खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा में मंगलवार को एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को कूटनीति के माध्यम से क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अनुशंसित किया गया। यह प्रस्ताव पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की विधायक फराह खान द्वारा विधानसभा सचिवालय को दिया गया। प्रस्ताव में पाकिस्तान की जिम्मेदार और सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी की सराहना की गई है।


प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के नेतृत्व ने पाकिस्तान की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है और इसे एक जिम्मेदार और शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया है। इसके अलावा, यह भी उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान ने वैश्विक संकट को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होने की संभावना कम है, क्योंकि बहुमत पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के पास है। इमरान खान, जो जेल में हैं, ने मुनीर की सेना प्रमुख के रूप में नियुक्ति का विरोध किया था। इसी तरह का एक प्रस्ताव पंजाब विधानसभा ने 16 अप्रैल को सर्वसम्मति से पारित किया था।