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पाकिस्तान में सेना की कमान में बड़ा बदलाव: जानें नए कानूनों के प्रभाव

पाकिस्तान ने अपने सैन्य ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसमें सेना की कमान और अधिकारों को नए तरीके से व्यवस्थित किया गया है। नए कानूनों के तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) को अधिक शक्तियाँ दी गई हैं, जिससे वह सशस्त्र बलों के संचालन और सेवानिवृत्ति से जुड़े निर्णय ले सकेंगे। इसके अलावा, डिफेंस फोर्सेज मुख्यालय की स्थापना का रास्ता भी साफ हो गया है। जानें इस बदलाव के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव।
 

पाकिस्तान में सैन्य ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन


नई दिल्ली: पाकिस्तान ने अपनी सेना और परमाणु कमान से जुड़े ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। हाल ही में नेशनल असेंबली ने दो महत्वपूर्ण विधेयकों को स्वीकृति दी, जिनसे सेना की कमान और अधिकारों को नए सिरे से व्यवस्थित करने का प्रस्ताव रखा गया है। नए कानूनों के अनुसार, चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) का पद और अधिक शक्तिशाली बना दिया गया है, जो वर्तमान में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पास है।


पिछले वर्ष के 27वें संविधान संशोधन के बाद, पाकिस्तान ने अपने सैन्य ढांचे में बदलाव की प्रक्रिया आरंभ की थी। इसके तहत ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पद समाप्त कर एक नया पद, चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, स्थापित किया गया। इस नए पद के माध्यम से सशस्त्र बलों की कमान को एक नए ढांचे में लाने की व्यवस्था की गई है। सीडीएफ के रूप में आसिम मुनीर को सेना से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में बड़ी जिम्मेदारी और अधिकार प्राप्त होंगे।


डिफेंस फोर्सेज मुख्यालय की स्थापना

प्रस्तावित कानून के तहत डिफेंस फोर्सेज मुख्यालय की स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। यह मुख्यालय पाकिस्तान के सशस्त्र बलों का प्रमुख सैन्य केंद्र बनेगा और इसकी कमान सीडीएफ के हाथ में होगी। सीडीएफ राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों में प्रधानमंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार की भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही, उनके पास सशस्त्र बलों के संचालन, कमान और नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण अधिकार होंगे। इन मामलों में सीडीएफ संघीय सरकार के प्रति जवाबदेह होंगे।


सेवा और सेवानिवृत्ति से जुड़े अधिकार

नए प्रावधानों के अंतर्गत, सीडीएफ को सशस्त्र बल कानून के दायरे में आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से संबंधित कई निर्णय लेने का अधिकार दिया जाएगा। वे किसी की सेवानिवृत्ति से जुड़े फैसले कर सकेंगे, इस्तीफे को स्वीकार या अस्वीकार कर सकेंगे और आवश्यकता पड़ने पर किसी को सेवा से हटाने या बनाए रखने का निर्णय भी ले सकेंगे। इसके अलावा, सेवानिवृत्ति की निर्धारित उम्र या सेवा अवधि में छूट देने का अधिकार भी सीडीएफ के पास होगा।


नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का नया पद

संशोधित ढांचे में कमांडर ऑफ द नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (सीएनएससी) का पद भी जोड़ा गया है। पिछले महीने जनरल सैयद आमिर रजा को लेफ्टिनेंट जनरल से पदोन्नत कर इस पद का पहला कमांडर नियुक्त किया गया था। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान डिफेंस फोर्सेज एक्ट, 2026 और संशोधित नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2010 को नेशनल असेंबली में पेश किया। निचले सदन से स्वीकृति मिलने के बाद, अब दोनों विधेयक आगे की प्रक्रिया के लिए सीनेट में भेजे जाएंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब पीओके में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध और तनाव बढ़ने की खबरें आ रही हैं।