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पोप का ईरान-अमेरिका शांति समझौते पर सकारात्मक बयान

पोप लियो XIV ने ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति समझौते का स्वागत किया, जो शुक्रवार को हस्ताक्षरित होगा। उन्होंने इसे बातचीत का सकारात्मक परिणाम बताया और मध्य पूर्व में स्थिरता की उम्मीद जताई। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की नाजुकता पर चिंता व्यक्त की है, यह कहते हुए कि यदि ईरान ने शर्तों का पालन नहीं किया, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है।
 

पोप लियो XIV का स्वागत

पोप लियो XIV ने बुधवार को ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति समझौते का स्वागत किया। इस समझौते पर शुक्रवार को हस्ताक्षर होने की योजना है। पोप ने आशा व्यक्त की कि यह समझौता मध्य पूर्व में आपसी विश्वास, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देगा। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसे बातचीत और धैर्य के परिणाम के रूप में वर्णित किया।


पोप ने समझौते में शामिल देशों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे लोगों के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने लिखा, "मैं इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच होने वाले समझौते का स्वागत करता हूँ, जिस पर शुक्रवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह समझौता बातचीत के माध्यम से किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है। मुझे उम्मीद है कि यह मध्य पूर्व में स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करेगा।"


ट्रंप का बयान

इन टिप्पणियों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही शांति प्रक्रिया में अनिश्चितता का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि हाल के तनाव को समाप्त करने के लिए सहमति बनी है, लेकिन यह समझौता अभी भी नाजुक है। ट्रंप ने मिस्र के राष्ट्रपति के साथ बैठक के दौरान कहा कि मौजूदा समझौता ज्ञापन कोई अंतिम दस्तावेज नहीं है।


उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान भविष्य में समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, "यह अंतिम नहीं है। यह एक समझौता ज्ञापन है, और यदि मुझे यह पसंद नहीं आया, तो हम फिर से कार्रवाई करेंगे।"