प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक दौरा: स्लोवाकिया में भारत की कूटनीतिक मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी का ब्रातिसलाबा दौरा
नई दिल्ली: भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को और मजबूत करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिसलाबा में कदम रखा। 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित होने के बाद, नरेंद्र मोदी इस देश के पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं, जो यहां 33 वर्षों में आए हैं। उनका यह ऐतिहासिक दौरा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री का संदेश
इस विशेष यात्रा के संदर्भ में, प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि ब्रातिसलाबा का दौरा भारत और स्लोवाकिया के बीच संबंधों की गहराई को समझने और सहयोग के नए अवसरों की खोज का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ होने वाली मुलाकातों को द्विपक्षीय हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
कूटनीतिक महत्व
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 14 से 16 जून तक चलने वाली यह यात्रा केवल द्विपक्षीय वार्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यूरोपीय संघ के साथ भारत की रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी को भी मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
उच्च स्तरीय संवाद का परिणाम
यह दौरा हाल के समय में दोनों देशों के बीच बढ़ते उच्च स्तरीय संवाद का परिणाम है। इससे पहले, अप्रैल 2025 में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्लोवाकिया का दौरा किया था, और इसके बाद फरवरी 2026 में स्लोवाक राष्ट्रपति पेलेग्रिनी ने भारत का दौरा किया था। अब प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से इन संबंधों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
साझेदारी के संभावित क्षेत्र
औद्योगिक सहयोग: स्लोवाकिया यूरोप में ऑटोमोबाइल और ट्रेन निर्माण का एक प्रमुख केंद्र है। भारत इस क्षेत्र में नवीनतम तकनीक और संयुक्त विनिर्माण पर चर्चा कर सकता है।
व्यापार और निवेश: दोनों देशों के व्यापारिक समूहों के बीच पूंजी निवेश को बढ़ावा देने और व्यापारिक बाधाओं को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
फ्रांस में आगामी कार्यक्रम
स्लोवाकिया में अपने कूटनीतिक कार्यों को पूरा करने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी सीधे फ्रांस के लिए रवाना होंगे, जहां उनका कार्यक्रम अत्यधिक व्यस्त रहेगा।
जी-7 शिखर सम्मेलन (16-17 जून): वे फ्रांस के एवियन में आयोजित होने वाले जी-7 सम्मेलन में भाग लेंगे, जहां वे वैश्विक चुनौतियों और डिजिटल एकजुटता पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे।
विवाटेक 2026 (18 जून): इसके बाद, वे पेरिस जाएंगे, जहां राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर 'विवाटेक 2026' में भाग लेंगे, जो भारतीय टेक-इकोसिस्टम के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा।