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प्रधानमंत्री मोदी की यूरोप यात्रा: ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग पर ध्यान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सप्ताह स्वीडन, नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली की यात्रा पर जाने वाले हैं। यह यात्रा ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नीदरलैंड में मोदी अपने समकक्ष से मुलाकात करेंगे, जहां व्यापार और ग्रीन अर्थव्यवस्था पर चर्चा होगी। इसके अलावा, नॉर्वे में तीसरी भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने का भी कार्यक्रम है। इस यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण समझौतों की संभावना है, जो भारत और यूरोपीय देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देंगे।
 

प्रधानमंत्री मोदी की आगामी यूरोप यात्रा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सप्ताह स्वीडन, नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली की यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में संकट के चलते भारत की विदेश नीति में ऊर्जा स्रोतों की विविधता लाना आवश्यक हो गया है। पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण उनकी प्रस्तावित यूरोप यात्रा रद्द कर दी गई थी। अब नए कार्यक्रम में यूएई को भी शामिल किया गया है, जो भारतीय प्रवासी और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


नीदरलैंड में, मोदी अपने समकक्ष रॉब रॉब जेटन से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में व्यापार, ग्रीन अर्थव्यवस्था और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, ग्रीन ऊर्जा, स्वास्थ्य और जल प्रबंधन के साथ-साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नई साझेदारियों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। नीदरलैंड भारत का 11वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और इस यात्रा के दौरान निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों की संभावना है।


तकनीकी और निवेश पर जोर

प्रधानमंत्री की स्वीडन और नॉर्वे यात्रा का मुख्य उद्देश्य नवाचार, प्रौद्योगिकी और निवेश सहयोग को मजबूत करना है। पीएम मोदी नॉर्वे में तीसरी भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। नॉर्डिक देश नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी में अग्रणी माने जाते हैं। इटली दौरे के दौरान, MSME और विनिर्माण क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। यह पीएम का यूरोप का पहला दौरा है, जो हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद हो रहा है।


यूएई के साथ संबंधों की मजबूती

इससे पहले, अप्रैल के अंत में, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की और अबू धाबी में राष्ट्रपति से मुलाकात की। यह यात्रा सऊदी अरब की उनकी यात्रा के एक सप्ताह बाद हुई थी। डोवाल की यह यात्रा सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों, विशेषकर आतंकवाद विरोधी सहयोग पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण थी। यह यात्रा मोदी की यात्रा की नींव भी रखती है।


यूएई के साथ व्यापार पिछले दो महीनों में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के कारण बाधित हुआ है, जिसमें केवल 11 भारतीय जहाज ही गुजर पाए हैं। मोदी ने हाल के महीनों में यूएई, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत की है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इन देशों के अपने समकक्षों के साथ संपर्क बनाए रखा है। अप्रैल में, जयशंकर ने यूएई के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया, यह बताते हुए कि जटिल क्षेत्रीय माहौल के बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद मजबूत और पारदर्शी बना हुआ है।