प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड में वैश्विक संकटों पर दी चेतावनी
नीदरलैंड में प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी
संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के बाद नीदरलैंड पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संकटों के प्रति चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दशक मानवता के लिए आपदाओं का दशक बनता जा रहा है। यदि ईंधन संकट का समाधान नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में लोग गरीबी के संकट में फंस सकते हैं। पिछले दशकों में जो भी प्रगति हुई है, वह खतरे में पड़ जाएगी।
आज मानवता के समक्ष कई गंभीर चुनौतियाँ हैं। कोरोना महामारी के बाद युद्धों का दौर शुरू हुआ है और अब ऊर्जा संकट भी सामने आ गया है। यह दशक आपदाओं का दशक बनता जा रहा है। यदि हालात में सुधार नहीं हुआ, तो पिछले कई दशकों की उपलब्धियों पर पानी फिर जाएगा और बड़ी जनसंख्या गरीबी के दलदल में फंस जाएगी। ऐसे में, वैश्विक स्तर पर रेजिलिएंट सप्लाई चेन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। भारत और नीदरलैंड मिलकर एक विश्वसनीय, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार सप्लाई चेन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
नीदरलैंड में पीएम मोदी ने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब लोगों के सपने साकार होते हैं, तो लोकतंत्र में उनका विश्वास और मजबूत होता है। जैसे ही उन्होंने असम और बंगाल चुनावों का उल्लेख किया, वहां मौजूद लोगों ने ताली बजाई। इसके बाद पीएम मोदी ने मजाक में पूछा कि क्या झालमुड़ी यहां तक भी पहुंच गई है?
पीएम मोदी ने बताया कि असम, बंगाल, केरल और पुडुचेरी में इस बार 80 से 90 प्रतिशत मतदान हुआ। इसमें महिलाओं की भागीदारी भी काफी बढ़ी है। यह हर राज्य का एक सामान्य ट्रेंड बन रहा है। आज भारत में मतदाता उत्साहित हैं और हर साल मतदान के रिकॉर्ड टूट रहे हैं। भारत में 90 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में 64 करोड़ लोगों ने मतदान किया, जो यूरोपीय संघ की कुल जनसंख्या से भी अधिक है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस रुकावट के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव एशियाई देशों पर पड़ा है। कई देशों ने राशनिंग प्रणाली लागू की है और कुछ में वाहनों को सम और विषम अंकों के आधार पर ईंधन दिया जा रहा है। भारत में भी सरकार ने नागरिकों से ईंधन की बचत करने की अपील की है।