प्रधानमंत्री मोदी ने 'भारत इनोवेट्स' में पेश की भारत की नवाचार क्षमता
भारत की बदलती तस्वीर का प्रदर्शन
नई दिल्ली: फ्रांस के नीस में आयोजित 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की नवाचार क्षमता और बदलती छवि को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं है, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनकर उभरा है। अपने संबोधन में, उन्होंने भारत-फ्रांस संबंधों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और भविष्य की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की।
नवाचार और उद्यमिता का नया युग
प्रधानमंत्री ने 'भारत इनोवेट्स' पहल को भारतीय प्रतिभा और यूरोपीय पूंजी के बीच एक महत्वपूर्ण पुल बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच भारतीय युवाओं और उद्यमियों को यूरोपीय विशेषज्ञता और वैश्विक अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। मोदी ने बताया कि 21वीं सदी का भारत नवाचार और उद्यमिता के विकास की नई धुरी बन चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है, जहां युवा नई सोच के साथ समाज की समस्याओं का समाधान खोज रहे हैं। कार्यक्रम में 100 से अधिक स्टार्टअप्स की भागीदारी के बावजूद, भारत में दो लाख से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं, बल्कि वैश्विक तकनीकी विकास और रोजगार सृजन में भी योगदान कर रहे हैं।
भारत की तकनीकी प्रगति
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत अब केवल नई तकनीकों का उपभोक्ता नहीं है, बल्कि उन्हें विकसित करने में भी अग्रणी है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसी तकनीकें भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, और भारत इन क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है।
भारत-फ्रांस संबंधों पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि यह साझेदारी केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित है। दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और मानवता के हित में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मानवता के लिए तकनीक
प्रधानमंत्री ने 'टेक्नोलॉजी फॉर ह्यूमैनिटी' और 'ह्यूमन-सेंट्रिक इनोवेशन' को भारत की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि तकनीकी विकास का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण होना चाहिए। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की सोच को 'एआई फॉर ऑल' की अवधारणा से जोड़ा, यह बताते हुए कि तकनीक का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए।
भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा
अपने संबोधन के अंत में, प्रधानमंत्री ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख किया और कहा कि नवाचार भारत की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। गणित, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और योग जैसे क्षेत्रों में भारत का योगदान सदियों से विश्व को दिशा देता आया है। आज का भारत उसी विरासत को आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।