फोर्सिथ काउंटी: भारतीय प्रवासियों का नया बसेरा और स्थानीय समुदाय की चुनौतियाँ
फोर्सिथ काउंटी में भारतीय प्रवासियों का उदय
(विजय जोशी) फोर्सिथ काउंटी (अमेरिका) में, लगभग दो शताब्दी पहले यूरोप से आए श्वेत लोगों ने मूल निवासियों को उनकी भूमि से बेदखल कर दिया था। अब, भारत से आए हजारों लोग उसी क्षेत्र में बस रहे हैं। तेलुगु, हिंदी और तमिल बोलने वाले ये प्रवासी लाखों डॉलर के महंगे घर खरीद रहे हैं और उत्तरी जॉर्जिया की हरी पहाड़ियों में छोटे-छोटे भारतीय समुदाय बना रहे हैं।
स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया
हालांकि, स्थानीय निवासियों को यह बदलाव पसंद नहीं आ रहा है। समुदाय के नेता बताते हैं कि भारतीय आमतौर पर अपने ही समुदाय में सीमित रहते हैं और श्वेत अमेरिकियों के साथ ज्यादा घुलते-मिलते नहीं हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
प्रवासी विरोधी भावनाओं का उदय
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ आंदोलन के चलते हाल के वर्षों में प्रवासी विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं। भारतीयों ने 1960 के दशक में जॉर्जिया में आना शुरू किया था, लेकिन उस समय उनकी संख्या बहुत कम थी।
संख्यात्मक वृद्धि
1990 के दशक के अंत में भारतीयों की संख्या बढ़ने के बावजूद, 2000 में फोर्सिथ काउंटी में केवल 160 भारतीय निवास कर रहे थे। आज, यह संख्या बढ़कर लगभग 52,000 हो गई है, जिससे काउंटी का स्वरूप बदल गया है।
भारतीयों का आर्थिक योगदान
भारतीय अब काउंटी की आबादी का 16 प्रतिशत हैं और श्वेत लोगों के बाद दूसरे सबसे बड़े जातीय समुदाय का गठन करते हैं। यहां भारतीयों की औसत वार्षिक आय लगभग 1,50,000 अमेरिकी डॉलर है, जो स्थानीय लोगों की औसत आय से अधिक है।
समुदाय में समावेश की आवश्यकता
अग्निहोत्री ने बताया कि भारतीयों की मौजूदगी से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ हुआ है, लेकिन उन्हें स्थानीय समुदाय के साथ घुलने-मिलने और विकास में योगदान देने के लिए प्रयास करने चाहिए।
नस्लीय भेदभाव का इतिहास
फोर्सिथ का इतिहास नस्लीय भेदभाव और हिंसा से भरा रहा है। 1912 में एक बलात्कार और हत्या की घटना के बाद, अश्वेत लोगों को इस क्षेत्र से निकाल दिया गया था।
भारतीयों का भविष्य
हालांकि आज फोर्सिथ में नस्लीय भेदभाव की घटनाएं कम हैं, लेकिन भारतीयों के लिए उस भूमि का अतीत जानना महत्वपूर्ण है, जहां वे अपना नया जीवन शुरू कर रहे हैं।