बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की स्थिति गंभीर, विद्रोहियों का बढ़ता दबदबा
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और बलूचिस्तान का संघर्ष
पाकिस्तान के नेता वैश्विक स्तर पर सहायता मांगते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि बलूचिस्तान अब पाकिस्तानी सेना के लिए एक कठिन चुनौती बन चुका है, जहां लगातार लाशें मिल रही हैं। बलूचिस्तान, जिस पर पाकिस्तान अपनी आर्थिक उम्मीदें टिका रहा है, वहां विद्रोही समूहों ने सेना को बुरी तरह से परेशान कर रखा है। हाल ही में नुस्की और खारान जिलों में हुई घटनाओं ने पाकिस्तान के नेताओं की नींद उड़ा दी है। नुस्की जिले के अहमदवाल क्षेत्र में सशस्त्र विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को इस तरह से निशाना बनाया कि वे बचाव नहीं कर सके। वहीं, खरान जिले में सेना की गाड़ियों को नुकसान पहुंचा और बारूदी सुरंगों के डर से उनकी गतिविधियां रुक गईं।
पाकिस्तानी सेना की विफलता और विद्रोहियों की ताकत
1 नवंबर को लियाज़ क्षेत्र में हुई झड़प और विस्फोट में सैनिकों की मौत और उनके ड्रोन के गिरने की घटनाओं ने सेना की प्रतिष्ठा को धूमिल कर दिया है। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) के दावों ने पाकिस्तान की खुफिया और सैन्य एजेंसियों की असलियत को उजागर किया है। बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वारम बलूच के अनुसार, अक्टूबर में 25 अभियानों में 129 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया गया। बीएलएफ ने ग्वादर में ऑपरेशन अलमास के तहत 80 से ज्यादा सैनिकों को खत्म करने का दावा किया है। पाकिस्तानी सेना के मजबूत ठिकाने विद्रोहियों के हमलों के सामने बिखर गए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार इन आंकड़ों को छिपाने की कोशिश कर रही है, लेकिन सच यह है कि बलूचिस्तान में सेना की स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है।
विद्रोहियों का प्रभाव और पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति
बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (बीआरजी) ने कच्ची जिले के सन्ने क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना के शिविर पर हमला कर 12 सुरक्षाकर्मियों को मार डाला। विद्रोहियों ने डेरा भुक्ति के सुई क्षेत्र से पंजाब तक गैस ले जाने वाली मुख्य पाइपलाइन को नष्ट कर दिया, जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को एक और झटका लगा। इस हमले ने यह साबित कर दिया कि विद्रोही जब चाहें पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ को तोड़ सकते हैं। पाकिस्तान के नेता बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन कर अपनी समस्याओं को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब उनकी सेना ही सुरक्षित नहीं है, तो विदेशी निवेशक क्यों आएंगे? बलूचिस्तान में विद्रोहियों की गतिविधियों और खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा की स्थिति ने पाकिस्तान के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।