बांग्लादेश और चीन के बीच जल प्रबंधन सहयोग पर समझौता
बांग्लादेश और चीन के बीच जल प्रबंधन पर समझौते
बांग्लादेश और चीन ने बृहस्पतिवार को तीस्ता और अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने के लिए सहमति जताई। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग के बीच हुई वार्ता के परिणामस्वरूप, दोनों देशों ने आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए 13 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। तीस्ता नदी का जल बंटवारा भारत के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है, जिससे यह सहयोग भारत-बांग्लादेश संबंधों पर प्रभाव डाल सकता है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता महदी अमीन ने बताया कि रहमान और चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग के बीच बैठक में नदियों के जल प्रबंधन में सहयोग पर सहमति बनी। सरकारी समाचार एजेंसी 'बांग्लादेश संगबाद संस्था' (बीएसएस) के अनुसार, दोनों पक्षों ने तीस्ता मास्टर प्लान, नदी प्रबंधन, बाढ़ के जोखिम को कम करने, नदी से गाद निकालने, कटाव को रोकने, सिंचाई और अंतर्देशीय जल परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
चीन यात्रा और समझौतों का विवरण
बीएसएस की रिपोर्ट के अनुसार, रहमान की चीन यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री क्विंग ने 'ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपल' में उनका औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई, जिसमें 13 ज्ञापन समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। अमीन ने बताया कि रहमान का शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात करने का कार्यक्रम है।
बैठक में रहमान ने बांग्लादेश की नदी गाद निकासी परियोजना पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य बाढ़ के जोखिम को कम करना, पर्यावरण की रक्षा करना और जल संसाधनों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करना है। उन्होंने इस कार्य के लिए चीन से तकनीकी सहायता की भी मांग की।
तीस्ता नदी प्रबंधन की योजना
रहमान ने बताया कि बांग्लादेश ने अगले पांच वर्षों में 20,000 किलोमीटर लंबी नदियों और नहरों से गाद निकालने और पद्मा व तीस्ता नदियों में जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एक कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया है। बीएसएस की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बीजिंग का दौरा किया था, जहां उन्होंने तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना के लिए चीन की भागीदारी और समर्थन मांगा था।
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह लाखों लोगों के लिए सिंचाई और आजीविका का एक मुख्य स्रोत है। चीन ने कई वर्षों से तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनरुद्धार परियोजना में रुचि दिखाई है, जो भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट स्थित है।
भारत का दृष्टिकोण
इस संदर्भ में, भारत ने 2024 में तीस्ता बेसिन के लिए तकनीकी और संरक्षण संबंधी सहायता की पेशकश की है, जो सीमा-पार नदियों के प्रबंधन में ढाका के साथ सहयोग को और मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाता है। भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे का मुद्दा हमेशा महत्वपूर्ण रहा है, खासकर गंगा नदी के जल के बंटवारे को लेकर।
अमीन ने बताया कि बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री क्विंग ने बांग्लादेश और चीन के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग, सतत विकास और आपसी समृद्धि के लिए करीबी साझेदारी का आह्वान किया।
चीन का सहयोग और बांग्लादेश की प्राथमिकताएँ
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, प्रधानमंत्री ली क्विंग ने कहा कि चीन, बांग्लादेश के साथ 'बेल्ट एंड रोड' सहयोग को बेहतर बनाने के लिए तैयार है। क्विंग ने नयी ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सूचना व संचार जैसे उभरते उद्योगों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।
रहमान ने कहा कि चीन के साथ संबंध विकसित करना ढाका की विदेश नीति की प्राथमिकता है और उन्होंने 'एक चीन' सिद्धांत का पालन करने की बात भी कही।