×

बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संबंध: क्या है इसके पीछे की रणनीति?

बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सैन्य और खुफिया संबंधों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे दक्षिण एशिया की कूटनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। हाल ही में DGFI का एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान गया, जहां उन्होंने ISI और पाक सेना के अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरे के पीछे की रणनीति और भारत पर संभावित दबाव बनाने की कोशिशों पर चर्चा की जा रही है। क्या बांग्लादेश भारत के खिलाफ एक नया मोर्चा खोलने की योजना बना रहा है? जानिए इस लेख में।
 

बांग्लादेश-पाकिस्तान के सैन्य रिश्तों में नई गहराई


नई दिल्ली: बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सैन्य और खुफिया संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं, जिससे दक्षिण एशिया की कूटनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। 15 अगस्त को बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी DGFI का एक 6 सदस्यीय दल पाकिस्तान पहुंचा, जिसका नेतृत्व कर्नल मगफूज-उल-बारी ने किया। इस यात्रा को दोनों देशों के सुरक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।


DGFI का पाकिस्तान दौरा और ISI से बातचीत

शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से ढाका और इस्लामाबाद के बीच संपर्क में लगातार वृद्धि हो रही है। DGFI का यह प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तानी सेना और ISI के उच्च अधिकारियों से मिला।


यह पहली बार नहीं है, जब DGFI के प्रमुख मेजर जनरल कैसर रशीद चौधरी इस्लामाबाद गए हैं। अप्रैल 2026 में भी उन्होंने ISI और पाक सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की थी।


खुफिया स्तर पर ही नहीं, बल्कि वायु सेना के स्तर पर भी बातचीत तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान और बांग्लादेश के वायु सेना प्रमुखों के बीच पाकिस्तान निर्मित 'JF-17 थंडर' लड़ाकू विमानों की बिक्री पर चर्चा हो चुकी है।


कूटनीतिक संकेत और BRICS पर बांग्लादेश की चुप्पी

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश की विदेश नीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। भारत ने सितंबर में होने वाले BRICS सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को निमंत्रण भेजा है, लेकिन ढाका ने अब तक अपनी भागीदारी पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया है। विशेषज्ञ इसे बांग्लादेश की बदलती कूटनीतिक रणनीति मानते हैं।


क्या बांग्लादेश भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है?

पूर्व भारतीय राजदूत अनिल त्रिगुणायत का मानना है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान के करीब जाकर भारत के खिलाफ एक 'रणनीतिक लीवर' बनाने की कोशिश कर रहा है। मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार के समय से ही ISI को बांग्लादेश में अपनी पैठ बनाने का अवसर मिला।


वर्तमान सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़कर रणनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रही है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच 4000 किमी से अधिक लंबी सीमा और मजबूत आर्थिक संबंध हैं, जिससे ढाका पूरी तरह से भारत विरोधी खेमे में नहीं जा सकता। लेकिन पाकिस्तान और चीन के साथ नजदीकी बढ़ाकर, वह नई दिल्ली पर अपनी शर्तें मनवाने का दबाव बना सकता है।


भारत के लिए नई चुनौतियाँ

हसीना सरकार के बाद, पाकिस्तान ने बांग्लादेश के सुरक्षा ढांचे में खुद को एक मजबूत साझेदार के रूप में स्थापित कर लिया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह बांग्लादेश के साथ 'सकारात्मक और रचनात्मक' संबंध चाहता है, जो आपसी हित और समानता पर आधारित हों।


हालांकि, पूर्वी सीमा पर पाकिस्तान और ISI की बढ़ती उपस्थिति नई दिल्ली के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती बन गई है। सुरक्षा एजेंसियाँ अब इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही हैं।