बांग्लादेश का ईंधन संकट: अमेरिका से रूसी डीजल खरीदने की मांग
बांग्लादेश का गंभीर ईंधन संकट
नई दिल्ली: ईरान के साथ चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। इस संकट के बीच, बांग्लादेश गंभीर ईंधन की कमी का सामना कर रहा है। देश ने अमेरिका से रूसी डीजल खरीदने के लिए अस्थायी छूट की मांग की है। बांग्लादेश का कहना है कि भारत को दी गई छूट के समान उसे भी अनुमति मिलनी चाहिए।
भारत का उदाहरण देते हुए बांग्लादेश की अपील
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश ने अमेरिका को एक पत्र भेजकर दो महीने के लिए आवश्यक डीजल की मांग की है, जिसमें अधिकतम 6 लाख मीट्रिक टन रूसी डीजल शामिल है। बांग्लादेश ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी, इसलिए उसे भी ऐसी ही सुविधा मिलनी चाहिए। ऊर्जा और खनिज संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव मोनिर हुसैन चौधरी ने कहा कि पत्र भेज दिया गया है और अब अमेरिका के जवाब का इंतजार है।
बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतें
बांग्लादेश, जिसकी जनसंख्या लगभग 17.5 करोड़ है, अपनी लगभग 95 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों के लिए अन्य देशों पर निर्भर है। ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है और कीमतें बढ़ गई हैं।
सरकार ने ईंधन की राशनिंग शुरू कर दी है, हालांकि ईद-उल-फितर के दौरान कुछ राहत दी गई थी। बांग्लादेश अब रूस, उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, अंगोला और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से ईंधन खरीदने की कोशिश कर रहा है।
भारत से बढ़ती खरीदारी
बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन अप्रैल में भारत की नुमालीगढ़ रिफाइनरी से 40,000 मीट्रिक टन डीजल आयात करने की योजना बना रहा है, जो मार्च के मुकाबले लगभग दोगुना है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध ऊर्जा बाजार को और प्रभावित कर सकता है, जिससे आयात पर निर्भर देशों के लिए स्थिति और कठिन हो रही है।
ट्रंप प्रशासन से बांग्लादेश की उम्मीदें
बांग्लादेश अमेरिका से उम्मीद कर रहा है कि वह जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेगा। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और आम लोगों को ईंधन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है। वर्तमान स्थिति पर नजर रखी जा रही है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बांग्लादेश को भी भारत की तरह छूट मिलती है या नहीं।