बांग्लादेश की भारत से मदद की गुहार: यूनुस की नई चालें
बांग्लादेश की स्थिति और भारत से मदद की आवश्यकता
बांग्लादेश, जो पाकिस्तान और चीन के साथ मिलकर हिंदुओं के खिलाफ खड़ा हुआ था, अब भारत के सामने झुकता नजर आ रहा है। यह देश अपनी वास्तविकता को भूलकर यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह भारत से भयभीत नहीं है, जबकि वास्तव में वह भारत से सहायता मांग रहा है।
बांग्लादेश लगातार भारत को उकसाने की कोशिश कर रहा है। कभी वह पाकिस्तान के करीब जा रहा है, तो कभी चीन के साथ संबंध बढ़ा रहा है, और कभी-कभी भारत के क्षेत्रों को अपने नक्शे में शामिल कर रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि बांग्लादेश तेजी से भूखमरी की ओर बढ़ रहा है। कट्टरपंथियों का यह देश अब भारत से लगातार मदद मांग रहा है। हाल ही में, बांग्लादेश ने 500 टन चावल के लिए भारत से सहायता मांगी थी, जिसकी कीमत लगभग $355 प्रति टन है।
यह चावल बांग्लादेश के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि वह इसे किसी अन्य देश से खरीदता, तो उसे अधिक कीमत चुकानी पड़ती। पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले यूनुस को अब अपनी स्थिति का एहसास हो गया है।
यूनुस अब भारत से नई मदद मांगने आया है।
यूनुस शायद भूल गया था कि बांग्लादेश का अधिकांश जीवन भारत से आने वाले पानी, अनाज, दवा, चावल, और ऊर्जा पर निर्भर है। जब भारत ने अपनी कूटनीति दिखाई, तो यूनुस की चालबाजी और बांग्लादेश में उसकी स्थिति कमजोर हो गई।
अंतरिम सरकार ने बताया कि 1880 टन डीजल की लागत 119.13 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो बांग्लादेशी मुद्रा में लगभग 14.62 करोड़ टका है।
इस सौदे में प्रति बैरल डीजल का बेस प्राइस 83.22 अमेरिकी डॉलर तय किया गया है। यह बेस प्राइस अंतरराष्ट्रीय बाजार दरों के अनुसार निर्धारित किया जाता है। भारत ने हमेशा बिना किसी स्वार्थ के कई देशों की मदद की है और यह समय-समय पर पूरी दुनिया ने देखा है।
डीजल की आपूर्ति को आसान और सस्ता बनाने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच बनी बांग्लादेश-इंडिया फ्रेंडशिप पाइपलाइन का उपयोग किया जाएगा। इस पाइपलाइन के जरिए ईंधन सीधे बांग्लादेश भेजा जाएगा, जिससे परिवहन लागत कम होगी और सप्लाई अधिक स्थिर रहेगी।