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बांग्लादेश के जमात प्रमुख ने भारतीय राजनयिकों के साथ गुप्त बैठक की खबरों का किया खंडन

बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने भारतीय राजनयिकों के साथ कथित गुप्त बैठक की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इन मुलाकातों में कुछ भी गोपनीय नहीं था और मीडिया की आलोचना की। रहमान ने फेसबुक पर स्पष्ट किया कि उन्होंने पिछले साल दो भारतीय राजनयिकों से मुलाकात की थी, लेकिन इसे गुप्त नहीं कहा जा सकता। भारत की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आगामी चुनावों के संदर्भ में, यह स्थिति भारत-बांग्लादेश संबंधों पर प्रभाव डाल सकती है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
 

शफीकुर रहमान का स्पष्ट बयान


नई दिल्ली: बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान ने भारतीय राजनयिकों के साथ कथित 'गुप्त बैठक' की खबरों को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि इन मुलाकातों में 'कुछ भी गोपनीय नहीं था' और मीडिया के एक हिस्से की आलोचना की जो तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहा है।


मीडिया रिपोर्ट्स का संदर्भ

बांग्लादेश के कई मीडिया संस्थानों ने रॉयटर्स के एक विशेष साक्षात्कार का हवाला देते हुए 2025 में भारतीय राजनयिकों और जमात प्रमुख के बीच गुप्त बैठकों की खबरें प्रकाशित की थीं। इन रिपोर्टों के प्रकाशन के बाद, शफीकुर रहमान ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।


फेसबुक पर दी सफाई

गुरुवार को एक फेसबुक पोस्ट में, शफीकुर रहमान ने बताया कि चिकित्सा उपचार के बाद घर लौटने पर उन्होंने पिछले साल के मध्य में दो भारतीय राजनयिकों से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि इन बैठकों को गुप्त कहना गलत है।


गोपनीयता का सवाल

उन्होंने लिखा, 'हमने कहा कि राजनयिकों के साथ बैठकें आमतौर पर सार्वजनिक की जाती हैं और हम भी ऐसा ही करना चाहते थे। लेकिन अनुरोध पर इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। इसमें कुछ भी गुप्त नहीं है।'


भारत की चुप्पी

इन कथित बैठकों पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और यह भी स्पष्ट नहीं है कि जिन राजनयिकों से मुलाकात हुई थी, वे कौन थे।


रॉयटर्स की रिपोर्ट का प्रभाव

शफीकुर रहमान की प्रतिक्रिया रॉयटर्स की रिपोर्ट के एक दिन बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि जमात-ए-इस्लामी सर्वसम्मति वाली सरकार में शामिल होने के लिए तैयार है।


आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि

बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं, जो भारत समर्थक शेख हसीना के शासन के बाद पहला चुनाव होगा।


भारत की रणनीति

रॉयटर्स ने बताया कि नई दिल्ली बांग्लादेश की अगली सरकार में शामिल होने की संभावना रखने वाली राजनीतिक पार्टियों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।


शफीकुर रहमान का बयान

शफीकुर रहमान ने कहा कि रॉयटर्स के पत्रकार ने उनसे पूछा था कि क्या भारत के अधिकारियों से कोई संपर्क हुआ था। उन्होंने कहा कि कई देशों के राजनयिकों से मुलाकातें हुई हैं, जिनमें भारत के दो राजनयिक भी शामिल थे।


गुप्त बैठक की खबरों की निंदा

जमात प्रमुख ने कहा, 'हमारे कुछ स्थानीय मीडिया संस्थानों ने गुप्त बैठकों की खबरें दी हैं। मैं ऐसी खबरों की कड़ी निंदा करता हूं।'


शेख हसीना की स्थिति

उन्होंने यह भी कहा कि शेख हसीना का भारत में रहना चिंता का विषय है, क्योंकि उनके पतन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में गिरावट आई है।


पाकिस्तान के प्रति जमात का रुख

पाकिस्तान के साथ जमात की निकटता पर शफीकुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी सभी देशों के साथ संतुलित संबंध चाहती है।


बीएनपी के साथ समीकरण

एक नए जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के बीच केवल चार प्रतिशत का अंतर है।


भारत के लिए महत्वपूर्ण समीकरण

भारत, जो बांग्लादेश के साथ गहरे ऐतिहासिक संबंध रखता है, को उम्मीद है कि वह अगली सरकार के साथ संवाद बनाए रखेगा। लेकिन जमात-ए-इस्लामी की संभावित जीत नई दिल्ली के लिए नई चुनौतियाँ पेश कर सकती है।