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बांग्लादेश में ऐतिहासिक फैसला: शेख हसीना के करीबी नेताओं को फांसी की सजा

बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के सात नेताओं को फांसी की सजा सुनाई है। यह निर्णय 2024 के छात्र जनविद्रोह के दौरान हुए अत्याचारों से संबंधित है। अदालत ने न केवल मौत की सजा का ऐलान किया, बल्कि दोषियों की संपत्ति जब्त कर हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया। जानें इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव।
 

बांग्लादेश में राजनीतिक भूचाल


नई दिल्ली: मंगलवार का दिन बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया। 2024 के छात्र जनविद्रोह के दौरान हुए अत्याचारों और मानवता के खिलाफ अपराधों के मामलों में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने कड़ा रुख अपनाया है। विशेष ट्रिब्यूनल-2 ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के सात प्रमुख नेताओं को फांसी की सजा सुनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अदालत ने न केवल मौत की सजा का ऐलान किया, बल्कि दोषियों की आधी संपत्ति जब्त कर हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा देने का रास्ता भी खोला है।


संपत्ति जब्ती और पीड़ितों का मुआवजा

ट्रिब्यूनल ने ओबैदुल कादर सहित पांच नेताओं की 50% चल-अचल संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है। इन संपत्तियों की नीलामी से प्राप्त राशि 'जुलाई फाउंडेशन' या किसी अधिकृत सरकारी संस्था के माध्यम से हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों और घायलों को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।


अदालत का कड़ा रुख और नेताओं की सूची

न्यायमूर्ति नजरुल इस्लाम चौधरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी नेताओं पर लगे गंभीर आरोपों को साबित करने में सफलता प्राप्त की। पीठ में न्यायमूर्ति मो. मंजुरुल बशिद और न्यायमूर्ति नूर मोहम्मद शाहरीयार कबीर शामिल थे। सभी सातों आरोपी देश छोड़कर फरार हैं, इसलिए यह अदालती कार्यवाही उनकी अनुपस्थिति में हुई, जहाँ राज्य द्वारा नियुक्त सरकारी वकीलों ने उनका पक्ष रखा।


फांसी की सजा पाने वालों में अवामी लीग के महासचिव और पूर्व मंत्री ओबैदुल कादर का नाम प्रमुख है। इसके अलावा, संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम, पूर्व सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात, जुबो लीग के अध्यक्ष शेख फजल शम्स पराश, महासचिव मैनुल हुसैन खान निखिल, छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन और महासचिव शेख वली आसिफ एनां को भी फांसी की सजा सुनाई गई है।


2024 के छात्र आंदोलन की भयावह पृष्ठभूमि

यह मामला जुलाई-अगस्त 2024 के उस जनआंदोलन से संबंधित है, जो सरकारी नौकरियों में आरक्षण के विरोध से शुरू होकर शेख हसीना सरकार के खिलाफ बड़े जनविद्रोह में बदल गया। प्रदर्शन को दबाने के लिए सत्तारूढ़ अवामी लीग, जुबो लीग और छात्र लीग के कैडरों का सहारा लिया गया। अभियोजन का दावा है कि इस दौरान 1400 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए और 25000 से ज्यादा घायल हुए। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन ने भी हिंसा में करीब 1400 मौतों का अनुमान लगाया था। फॉरेंसिक जांच में कादर को कार्यकर्ताओं को हमले के निर्देश देते सुना गया था, जबकि अराफात पर मीडिया नियंत्रण का आरोप था। 5 अगस्त 2024 को सत्ता गिरने के बाद हसीना भारत चली गईं।


शेख हसीना को भी मिल चुकी है सजा

इससे पहले, नवंबर 2025 में ट्रिब्यूनल-1 ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी इन्हीं अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई थी। हसीना को उकसाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों के इस्तेमाल का दोषी पाया गया था। भारत में रह रहीं हसीना की पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर आया यह ताजा फैसला अवामी लीग के राजनीतिक भविष्य पर और गहरा संकट खड़ा करता है।