बांग्लादेश में नई सरकार के गठन से भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की उम्मीद
बांग्लादेश में नई सरकार का गठन
बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के साथ ही स्थिति में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के प्रति जो रुचि दिखाई है, वह दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। उनके द्वारा दिए गए बयानों और लिए गए निर्णय इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि पिछले 18 महीनों से चल रहा तनाव अब समाप्त होने की ओर अग्रसर है। विकास और शांति के नए रास्ते खुलने की संभावना है। तारिक रहमान ने कट्टरपंथियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि हिंदुओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा को सहन नहीं किया जाएगा।
सरकार की विकास नीति
तारिक रहमान ने अपनी कैबिनेट की पहली बैठक में विकास केंद्रित नीतियों को प्राथमिकता देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, उन्होंने भारत के खिलाफ नफरत फैलाने वाले मोहम्मद यूनुस के निर्णयों में बदलाव करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके अलावा, भारत विरोधी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। इस सख्त रुख को देखते हुए भारत ने भी बांग्लादेश के साथ संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने का निर्णय लिया है।
भारत की वीजा सेवाओं की बहाली
भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संकेत दिया है कि वह जल्द ही बांग्लादेश में अपनी वीजा सेवाओं को पूरी तरह से बहाल करने की योजना बना रहा है। नई सरकार के गठन के बाद इसे दोनों देशों के बीच दोस्ती की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। सिलट में भारत के वरिष्ठ काउंसलर अधिकारी अनिरुद्ध दास ने पुष्टि की है कि भारत बांग्लादेश के लिए पूर्ण वीजा सेवाएं फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मेडिकल और डबल एंट्री वीजा जारी किए जा रहे हैं, और यात्रा वीजा सहित अन्य श्रेणियों को फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों का इतिहास
भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध जुलाई और अगस्त 2024 में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद तेजी से बिगड़ गए थे, जो शेख हसीना के तख्तापलट के दौरान शुरू हुए थे। इन प्रदर्शनों में हिंदुओं को निशाना बनाया गया था, उनके घरों पर हमले किए गए और कई को जान से मार दिया गया। इस दौरान भारत विरोधी बयानबाजी भी बढ़ गई थी, और कई कट्टरपंथियों को जेल से रिहा कर दिया गया था।