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बांग्लादेश में भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का गुप्त दौरा, कूटनीतिक हलचल तेज

बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी डीजीएफआई के निमंत्रण पर भारत के चार सुरक्षा अधिकारियों का गुप्त दौरा ढाका में हुआ है। यह दौरा प्रधानमंत्री शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आया है, जिसने बांग्लादेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। भारत के उच्चायुक्त की प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ होने वाली मुलाकात से पहले इस दौरे ने कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। जानें इस दौरे के पीछे की असली वजह और क्या यह दोनों देशों के बीच सुरक्षा समझौते की ओर इशारा करता है।
 

बांग्लादेश में सुरक्षा अधिकारियों का अचानक दौरा

ढाका से एक महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली खबर आई है। बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी डीजीएफआई के निमंत्रण पर भारत के चार प्रमुख सुरक्षा अधिकारियों का एक गुप्त प्रतिनिधिमंडल अचानक ढाका पहुंचा है। इस बीच, प्रधानमंत्री शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में हलचल पैदा कर दी है। वहीं, भारत के उच्चायुक्त की प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ होने वाली महत्वपूर्ण मुलाकात से पहले इस गुप्त दौरे ने कूटनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। रविवार को एयर इंडिया की उड़ान से ये अधिकारी ढाका पहुंचे।


यह ध्यान देने योग्य है कि इन अधिकारियों की सुरक्षा और आवास की व्यवस्था बांग्लादेश की प्रमुख खुफिया एजेंसी डीजीएफआई ने की, और उन्हें सीधे होटल में ठहराया गया।


कूटनीतिक वार्ता का संदर्भ

यह दौरा उस समय हो रहा है जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ भारतीय उच्चायुक्त की आमने-सामने की बैठक पहले से निर्धारित है। हालांकि, अधिकारियों के नाम और उनके पदों को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सुरक्षा समझौते या बातचीत की संभावना है।


इस गर्मागर्मी के पीछे का असली कारण शेख हसीना का वह विवादास्पद बयान है। बांग्लादेश छोड़ने के दो साल बाद, 5 अगस्त को नई दिल्ली से शेख हसीना ने वर्चुअल मीडिया के माध्यम से जो बयान दिया, उसने ढाका की राजनीतिक स्थिति को हिला कर रख दिया। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और विदेश मंत्रालय ने इस पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि भारत द्वारा हसीना को मंच देना बांग्लादेश की संप्रभुता का उल्लंघन है।


भारत का स्पष्टीकरण

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम किसी निजी मीडिया संगठन का था और भारत सरकार का इससे कोई संबंध नहीं है। भारत ने यह भी कहा है कि वह उन बयानों का समर्थन नहीं करता। लेकिन इस बयानबाजी के बाद उत्पन्न कूटनीतिक तनाव को कम करने के लिए अब सुरक्षा अधिकारियों का यह प्रतिनिधिमंडल ढाका में मौजूद है।


अब सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री तारिक रहमान सितंबर में होने वाली बीआईएमएस टीईईसी मीटिंग के लिए नई दिल्ली आएंगे?