बुध ग्रह के रहस्यों की खोज में BepiColombo मिशन की महत्वपूर्ण प्रगति
बुध ग्रह के रहस्यों की खोज
नई दिल्ली - सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह बुध, जो सूर्य के निकटतम है, के रहस्यों का खुलासा जल्द ही होने वाला है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) द्वारा संचालित BepiColombo मिशन, जो लगभग आठ वर्षों से चल रहा है, अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुका है।
इस मिशन को 20 अक्टूबर 2018 को लॉन्च किया गया था और इसने अरबों किलोमीटर की यात्रा पूरी की है। इस दौरान, अंतरिक्ष यान ने अपनी गति और दिशा को नियंत्रित करने के लिए पृथ्वी, शुक्र और बुध के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग किया। अब यह मिशन अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है।
महत्वपूर्ण पड़ाव: ट्रांसफर मॉड्यूल का अलग होना
3 सितंबर को, मर्करी ट्रांसफर मॉड्यूल ने दोनों वैज्ञानिक ऑर्बिटरों से अलग होकर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया। अब, अगला बड़ा चरण 21 नवंबर को होगा, जब दोनों वैज्ञानिक यान बुध की कक्षा में प्रवेश करने का प्रयास करेंगे।
बुध तक पहुंचने की चुनौतियाँ
बुध तक पहुंचना अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक कठिन कार्य है। सूर्य के निकट होने के कारण, उसका गुरुत्वाकर्षण यान को तेज गति से अपनी ओर खींचता है, जिससे यान को अपनी गति को काफी कम करना पड़ता है।
BepiColombo ने इस चुनौती का सामना करने के लिए जटिल मार्ग अपनाया, जिसमें कुल 9 फ्लाईबाय शामिल थे—एक पृथ्वी के, दो शुक्र के और छह बुध के। इन फ्लाईबाय ने यान की ऊर्जा और गति को नियंत्रित करने में मदद की।
दो ऑर्बिटर, दो अलग-अलग कार्य
बुध की कक्षा में पहुंचने के बाद, दोनों वैज्ञानिक ऑर्बिटर अलग-अलग कार्य करेंगे। MPO (Mercury Planetary Orbiter) यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का यान है, जो बुध की सतह, आंतरिक संरचना और रासायनिक बनावट का अध्ययन करेगा।
वहीं, Mio (Mercury Magnetospheric Orbiter) जापान की JAXA का यान है, जिसका मुख्य उद्देश्य बुध के चुंबकीय क्षेत्र और सौर हवाओं के साथ उसकी प्रतिक्रिया को समझना है।
बर्फ और चुंबकीय क्षेत्र के रहस्यों का खुलासा
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि BepiColombo मिशन बुध के ध्रुवीय क्षेत्रों में स्थायी रूप से छायादार गड्ढों में बर्फ के भंडार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाएगा। इसके अलावा, ग्रह की सतह पर मौजूद विशाल गड्ढों और उसकी आंतरिक संरचना का भी अध्ययन किया जाएगा।
यह मिशन यह समझने में भी मदद करेगा कि सूर्य के निकट स्थित बुध का निर्माण कैसे हुआ और उसके विकास पर सूर्य के वातावरण का क्या प्रभाव पड़ा।
मुख्य वैज्ञानिक अध्ययन की शुरुआत
योजना के अनुसार, दिसंबर 2026 में दोनों ऑर्बिटर पूरी तरह अलग हो जाएंगे, और MPO मार्च 2027 तक अपनी अंतिम वैज्ञानिक कक्षा में पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद, अप्रैल 2027 से मुख्य वैज्ञानिक अध्ययन शुरू होने की संभावना है।
आठ वर्षों की यात्रा और कई गुरुत्वाकर्षणीय फ्लाईबाय के बाद, BepiColombo अब उस चरण में पहुंच गया है, जहां बुध के रहस्यों पर काम शुरू होगा, जिन्हें वैज्ञानिक लंबे समय से समझने की कोशिश कर रहे हैं।