ब्राजील के राष्ट्रपति लुला की ट्रंप से मुलाकात: व्यापारिक तनाव कम करने की कोशिश
लुला और ट्रंप की महत्वपूर्ण मुलाकात
ब्राजील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को कम करना था। हालांकि, इस मुलाकात के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लुला शामिल नहीं हुए, जो कि आमतौर पर विश्व नेताओं के लिए एक सामान्य प्रथा है। व्हाइट हाउस में उपस्थित लोगों ने ब्राज़ीलियाई पत्रकारों की तस्वीरें साझा कीं, जो वहां से बाहर निकलते हुए देखे गए।
कुछ MAGA समर्थकों ने यह अनुमान लगाया कि लुला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग नहीं लिया क्योंकि उनकी ट्रंप के साथ बातचीत काफी गर्मागर्म रही होगी। लोकप्रिय दक्षिणपंथी टिप्पणीकार निक सॉर्टर ने कहा कि ट्रंप ने बंद दरवाजों के पीछे लूला की आलोचना की होगी। सॉर्टर ने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें ब्राज़ीलियाई पत्रकार व्हाइट हाउस से बाहर निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं।
एक अन्य यूजर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह पुष्टि हो गई है कि ट्रंप और लूला की मुलाकात का कोई भी हिस्सा प्रेस के लिए खुला नहीं रहेगा। लूला अब व्हाइट हाउस से रवाना हो रहे हैं, और यह एक अप्रत्याशित बदलाव है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लूला को एक प्रभावशाली व्यक्ति बताया, जबकि लूला ने कहा कि उनकी तीन घंटे की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं की इस मुलाकात पर सभी की नजरें थीं, खासकर पिछले साल अमेरिका द्वारा ब्राजील पर टैरिफ लगाने के बाद से रिश्तों में तनाव आ गया था।
ब्राजील में चुनाव और लूला की चुनौतियाँ
विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर में ब्राजील में चुनाव होने वाले हैं, और लूला को इस संदर्भ में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वह पिछले साल की तरह अमेरिका की टैरिफ नीति के खिलाफ ग्लोबल साउथ देशों के साथ चलाए गए अभियान से बचना चाहेंगे। वर्तमान में पश्चिम एशिया के संकट के कारण जियो पॉलिटिक्स की स्थिति बदल गई है, और लूला इस समय ट्रंप से सीधे टकराव नहीं चाहते। पिछले साल जब ट्रंप ने टैरिफ लगाया था, तब लूला ने कहा था कि ट्रंप दुनिया के शहंशाह नहीं हैं।
ब्रिक्स लीडर्स समिट में लूला की संभावित भागीदारी
सितंबर में भारत में ब्रिक्स लीडर्स समिट आयोजित होने वाली है, जिसमें ब्राजील के राष्ट्रपति लुला के शामिल होने की संभावना है। ब्रिक्स देशों के इस बार के एजेंडे पर अभी भी शेरपा स्तर की बैठकें चल रही हैं। इन राजनयिक वार्ताओं में सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि मिलते हैं और समिट के एजेंडे को तैयार करने का प्रयास करते हैं। पिछली समिट में साझा ब्रिक्स करेंसी पर चर्चा हुई थी, लेकिन इसमें कई समस्याएं और विरोध सामने आए थे। भारत ने हमेशा ही डि-डॉलराइजेशन का विरोध किया है और नई दिल्ली की कोशिश रही है कि वह G-7 और ब्रिक्स के बीच संतुलन बनाए रखे। इस बार भी इस तरह के मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना कम लगती है।