ब्रिटिश सांसद ने ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल पर उठाई आवाज़, पीड़िताओं की दास्तान सुनाई
संसद में भावुक भाषण
नई दिल्ली: ब्रिटेन के सांसद रूपर्ट लोव ने संसद में एक दिल को छू लेने वाला भाषण देकर ग्रूमिंग गैंग विवाद पर फिर से चर्चा शुरू की है। उन्होंने स्वतंत्र सुनवाई के दौरान सामने आए पीड़ितों के बयान पढ़कर सबका ध्यान आकर्षित किया। लोव ने कहा कि दुनिया को उन घटनाओं के बारे में जानना चाहिए जो सुनवाई में सामने आईं। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे बहादुर सर्वाइवर्स की आवाज़ सुनें और अब कार्रवाई करें।
सिस्टम की विफलता पर सवाल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लोव ने अपने भाषण में बताया कि कैसे बड़े पैमाने पर यौन शोषण, हिंसा और धमकियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि लड़कियों को नस्ल के आधार पर निशाना बनाया गया। पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। लोव का कहना है कि सरकारी अधिकारी, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और चिल्ड्रन होम के स्टाफ बार-बार कमजोर बच्चों की सुरक्षा में असफल रहे।
85 क्षेत्रों में फैला नेटवर्क
ये बयान बच्चों के ग्रुप-बेस्ड यौन शोषण की स्वतंत्र जांच के दौरान दर्ज किए गए। पिछले साल, लोव की अगुवाई में हुई निजी जांच में ब्रिटेन के कम से कम 85 क्षेत्रों में ऐसे गैंग का पता चला था। अगस्त में जारी एक बयान में कहा गया कि ये गैंग ज्यादातर पाकिस्तानी मूल के पुरुषों द्वारा संचालित थे और दशकों से सक्रिय थे। इनका दायरा पहले के अनुमान से कहीं अधिक बड़ा था। रिपोर्ट में पाकिस्तानी पुरुषों के पैटर्न और सरकारी संस्थाओं की लापरवाही को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।
पीड़िताओं की दर्दभरी कहानियाँ
लोव ने संसद में कई पीड़िताओं के बयान पढ़े। एक सर्वाइवर ने बताया कि 13 साल की उम्र से तीन साल तक सैकड़ों लोगों ने उसका शोषण किया। कई बयानों में धर्म और नस्ल के आधार पर भेदभाव की बातें सामने आईं। एक पीड़िता ने कहा कि अपराधी ईसाई लड़कियों को कम नैतिक मूल्यों वाली बताकर अपने कार्यों को सही ठहराते थे, जबकि मुस्लिम लड़कियों को ऊंचे मूल्यों वाली बताया जाता था।
पुलिस और अस्पताल पर गंभीर आरोप
कुछ पीड़िताओं ने पुलिस अधिकारियों पर भी शोषण के आरोप लगाए। एक बयान में कहा गया कि देश के विभिन्न हिस्सों में पुलिसवालों ने बलात्कार किया। एक अन्य सर्वाइवर ने बताया कि जब वह 15 साल की उम्र में अस्पताल गई, तो स्टाफ ने कोई सवाल नहीं पूछा और केवल दवा देकर भेज दिया। एक गवाह ने कहा कि ईद और छुट्टियों के दौरान शोषण की घटनाएँ बढ़ जाती थीं। पार्टियाँ बड़ी और अधिक हिंसक हो जाती थीं।
पिंजरों में बंद करने का आरोप
लोव ने एक महिला का बयान भी पढ़ा जिसने 15 से 20 लड़कियों को पिंजरों में बंद देखा था। एक अन्य पीड़िता ने बताया कि उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। लोव ने कहा कि एक सर्वाइवर ने अपील की कि यह सब रुकना चाहिए ताकि किसी और बच्चे के साथ ऐसा न हो। लोगों को डरना बंद करना चाहिए और सच में कुछ करना चाहिए।