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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से पाकिस्तान में मचा हंगामा, ट्रंप की नीतियों पर उठे सवाल

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते ने पाकिस्तान में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर टैरिफ को घटाने के निर्णय ने पाकिस्तान के नेताओं को चिंतित कर दिया है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है, जबकि विपक्ष ने इसे सरकार की रणनीतिक विफलता बताया है। जानें इस समझौते के पीछे की कहानी और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया के बारे में।
 

पाकिस्तान में व्यापार समझौते की प्रतिक्रिया


नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते ने पाकिस्तान में असंतोष का माहौल बना दिया है। 2 फरवरी 2026 को घोषित इस समझौते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। इसके बदले में भारत ने रूसी तेल की खरीद को रोकने और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने पर सहमति जताई। पाकिस्तान को 19 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है, जो भारत से 1 प्रतिशत अधिक है।


ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इंडिया गेट और एक मैगजीन कवर की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि मोदी की 'दोस्ती और सम्मान' के कारण टैरिफ को 18 प्रतिशत किया गया। पाकिस्तान में इसे एक बड़ा झटका माना गया, क्योंकि वहां के नेताओं ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया था। इसके बावजूद पाकिस्तान को बेहतर सौदा नहीं मिल सका।


सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। एक वायरल पोस्ट में यूजर उमर अली ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ 'रखैल जैसा' व्यवहार किया, सभी काम करवाए लेकिन सौदा देने से मना कर दिया। उन्होंने एक एआई जनरेटेड इमेज भी साझा की, जिसमें मुनीर दुर्लभ खनिजों का डिब्बा पकड़े हुए उदास खड़े हैं।


पाकिस्तानी विपक्ष की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के पूर्व मंत्री हम्माद अजहर ने कहा कि 21वीं सदी में विदेश नीति चापलूसी या व्यक्तिगत रिश्तों पर नहीं चलती। यह आर्थिक ताकत, टैरिफ और बाजार पहुंच का खेल है। भारत ने यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ डील करके इसे साबित किया है। चापलूसी और फोटो से कुछ नहीं मिलता।


पत्रकार असद तूर ने चेतावनी दी कि यह निर्णय पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं को और बढ़ाएगा। निर्यात में गिरावट आएगी, विदेशी निवेश कम होगा और सौदेबाजी की ताकत खत्म हो जाएगी। इमरान रियाज खान ने कहा कि 'मुख्य विक्रेता' वाली रणनीति विफल हो गई है। बलूचिस्तान के खनिज लकड़ी के बक्सों में भरकर दे सकते हैं, लेकिन सम्मान नहीं खरीद सकते।


भारत के लिए लाभ

यह समझौता भारत के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है। इससे निर्यात में 150 अरब डॉलर तक की वृद्धि की उम्मीद है। भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बातचीत की, जबकि पाकिस्तान व्यक्तिगत पैरवी पर अधिक निर्भर रहा। पाकिस्तानी विपक्ष इसे रणनीतिक विफलता मान रहा है। मीडिया और सोशल मीडिया पर 'मूवर्स, शेकर्स एंड बेगर्स' जैसी टिप्पणियां वायरल हो रही हैं।