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भारत-इजरायल की नई साझेदारी: क्या हैं प्रमुख समझौते और भविष्य की योजनाएं?

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी और इजरायल के पीएम नेतन्याहू के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इस बैठक में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, AI और तकनीकी विकास, कृषि और मत्स्य क्षेत्र में साझेदारी, और व्यापारिक अवसरों के विस्तार पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने डिजिटल और वित्तीय सहयोग को भी प्राथमिकता दी। इसके अलावा, मोदी ने गाजा शांति योजना का समर्थन किया। जानें इन समझौतों का भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा और भारत-इजरायल संबंधों में क्या नई संभावनाएं खुल रही हैं।
 

विशेष रणनीतिक साझेदारी का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बैठक में दोनों देशों के बीच संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया। यह निर्णय दोनों देशों के बीच विश्वास और साझा मूल्यों को दर्शाता है। संयुक्त बयान में दीर्घकालिक सहयोग पर जोर दिया गया, और दोनों नेताओं ने साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाने की बात की। पिछले दशक में हुई प्रगति को महत्वपूर्ण माना गया है, और इस दौरे को कूटनीतिक दृष्टि से मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे भविष्य के सहयोग की दिशा स्पष्ट होगी।


आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति

आतंकवाद विरोध पर क्या सहमति?

बैठक में आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की रणनीति पर सहमति बनी। मोदी ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ एकजुट हैं। सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया, और खुफिया साझेदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देने की बात कही गई। दोनों देशों ने वैश्विक मंचों पर सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया, जो कि सुरक्षा साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


AI और तकनीकी सहयोग के नए आयाम

AI और टेक्नोलॉजी में क्या समझौते?

भारत और इजरायल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। शिक्षा में AI के उपयोग को लेकर भी सहमति बनी, और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। टेक स्टार्टअप के सहयोग को बढ़ावा देने से डिजिटल साझेदारी में नई संभावनाएं खुलेंगी। विशेषज्ञ इसे भविष्य की साझेदारी का आधार मानते हैं।


कृषि और मत्स्य क्षेत्र में सहयोग

कृषि और मत्स्य क्षेत्र में क्या सहयोग?

कृषि और जलीय कृषि के क्षेत्र में भी कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। भारत-इजरायल नवाचार केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें आधुनिक खेती तकनीकों को साझा करने पर जोर दिया गया। मत्स्य पालन में अनुसंधान सहयोग बढ़ाने की योजना है, जिससे किसानों और मत्स्य व्यवसाय को लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।


व्यापार और निवेश के नए अवसर

व्यापार और निवेश पर क्या निर्णय?

दोनों देशों ने वाणिज्य और सेवा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। विनिर्माण और रेस्तरां उद्योग में भी समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। व्यापार प्रोटोकॉल लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, और निवेश बढ़ाने के लिए नीतिगत सहयोग तय हुआ है। आर्थिक साझेदारी को व्यापक बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में तेजी आ सकती है।


डिजिटल और वित्तीय सहयोग का महत्व

डिजिटल और वित्तीय सहयोग कितना अहम?

बैठक में डिजिटल भुगतान सहयोग को लेकर भी समझौता हुआ। भारत के NPCI और इजरायल के मासाव के बीच यूपीआई कनेक्टिविटी पर हस्ताक्षर किए गए। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना बनी है, जिससे वित्तीय सेवा संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ेगा। इससे फिनटेक क्षेत्र में साझेदारी मजबूत होगी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। इसे आधुनिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


गाजा शांति योजना पर भारत का दृष्टिकोण

गाजा शांति योजना पर भारत का रुख?

मोदी ने गाजा पीस प्लान को पूरा समर्थन देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इंसानियत को संघर्ष का शिकार नहीं होना चाहिए। भारत ने क्षेत्रीय शांति के लिए सभी साझेदारों के साथ काम करने का भरोसा दिया। मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, जिससे संतुलित कूटनीति का संदेश सामने आया। भारत की भूमिका मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, और यह बयान शांति प्रयासों के समर्थन का संकेत है।