भारत और अमेरिका के बीच चाबहार बंदरगाह पर सहयोग जारी
भारत सरकार ने चाबहार बंदरगाह पर अमेरिका के साथ अपने सहयोग की स्थिति को स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि चाबहार भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। हाल ही में आई रिपोर्टों के बावजूद, भारत ने इस परियोजना में अपनी भागीदारी को बनाए रखने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया है। जानें चाबहार पोर्ट का महत्व और अमेरिका का इस पर क्या रवैया रहा है।
Jan 17, 2026, 14:01 IST
भारत का चाबहार बंदरगाह पर अमेरिका के साथ संपर्क
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह चाबहार बंदरगाह के मुद्दे पर अमेरिका के साथ लगातार संवाद में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि चाबहार से भारत के पीछे हटने की खबरें गलत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 25 अक्टूबर 2005 को अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने ईरान से संबंधित कुछ प्रतिबंधों में छूट दी थी, जो 26 अप्रैल 2026 तक मान्य है। भारत इसी व्यवस्था के तहत अमेरिका के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत ने चाबहार से अपनी साझेदारी समाप्त कर दी है, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए थे। प्रवक्ता ने कहा कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक संबंध रहे हैं और भारत वहां की स्थिति पर नजर रखे हुए है。
भारत के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए कदम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत चाबहार परियोजना में अपनी प्रत्यक्ष हिस्सेदारी कम करने के लिए 120 मिलियन डॉलर की राशि को स्थानांतरित करने जैसे कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। एक अन्य विकल्प यह है कि चाबहार परियोजना के विकास को जारी रखने के लिए एक नई इकाई का गठन किया जाए, जिससे भारतीय सरकार पर जोखिम कम हो सके। इस परियोजना का रणनीतिक महत्व और भारत, ईरान, अफगानिस्तान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले 7,200 किलोमीटर लंबे अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) में इसकी संभावित भूमिका के कारण भारत इसके प्रति प्रतिबद्ध है।
चाबहार पोर्ट का महत्व
भारत के लिए चाबहार पोर्ट कितना अहम है?
ईरान का चाबहार पोर्ट भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र है। 2016 से भारत ने इस पोर्ट में निवेश किया है, जिसमें 4,700 करोड़ रुपए शामिल हैं। भारत पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड चाबहार के शाहिद टर्मिनल का संचालन कर रहा है। चाबहार पोर्ट के माध्यम से भारत को पाकिस्तान को बाइपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों में पहुंच मिलती है। इसके अलावा, चाबहार पोर्ट से भारत को नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के जरिए भी कनेक्टिविटी प्राप्त होती है। हाल ही में भारत ने उज्बेकिस्तान के साथ चाबहार के माध्यम से व्यापार वार्ता की थी।
अमेरिका का चाबहार पोर्ट पर रवैया
चाबहार पोर्ट पर अब तक अमेरिका का रवैया क्या रहा?
2018 में ट्रम्प द्वारा ईरान पर प्रतिबंधों की घोषणा के बावजूद भारत को इस पोर्ट के विकास में कोई रुकावट नहीं आई। बाद में बाइडेन प्रशासन ने भी छूट जारी रखी। ट्रम्प ने 29 सितंबर को छूट हटाने का आदेश दिया, लेकिन अक्टूबर में इसे अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया गया।