भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव: ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों की मौत पर प्रतिक्रिया
भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक तनाव
नई दिल्ली: ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर की गई कार्रवाई और तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु ने भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में तनाव को बढ़ा दिया है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ फोन पर बातचीत की, जिसमें उन्होंने अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों पर अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की। हालांकि, रूबियो ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलसंधि से गुजरने वाले सभी जहाजों को अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी
तीन जहाजों पर हमले
बातचीत के दौरान, मार्को रूबियो ने स्पष्ट रूप से कहा कि होर्मुज जलसंधि में सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध तस्करी को किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा।
हमलों की श्रृंखला
तीन तेल टैंकरों पर हमला
यह विवाद तब शुरू हुआ जब जून के पहले सप्ताह में अमेरिकी सेना ने भारतीय क्रू मेंबर वाले तीन तेल टैंकरों पर हमला किया। 8 जून को पलाऊ के झंडे वाले टैंकर 'मैरिवेक्स' पर अमेरिकी कार्रवाई हुई, जिसमें 24 भारतीय सवार थे, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। 10 जून को पलाऊ के दूसरे टैंकर 'सेटेबेलो' पर अमेरिका ने हमला किया, जिसमें 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मृत्यु हो गई। 11 जून को गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले टैंकर 'जलवीर' को निशाना बनाया गया, जिसमें 20 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद थे।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
ट्रंप का अलग आरोप
भारत ने नई दिल्ली में शुक्रवार को अमेरिकी चार्ज डी'अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब करते हुए कड़ा रुख अपनाया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय नागरिकों पर अमेरिकी सेना के ये घातक हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।
जानलेवा कार्रवाई उचित नहीं-जयशंकर
अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत के बाद, एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने लिखा, 'मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के उन हमलों पर भारत की कड़ी आपत्ति दोहराई है, जिनमें हमारे तीन नाविक मारे गए। कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ ऐसी जानलेवा और हिंसक कार्रवाई को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।'