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भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच नई रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत

भारत और उज़्बेकिस्तान ने हाल ही में एक नई रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की है, जिसमें खनन, व्यापार और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर जोर दिया गया है। उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच हुई मुलाकात ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान किया है। इस सहयोग से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद है।
 

भारत की नई भू-राजनीतिक पहल

भारत अब मध्य एशिया में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है, जो वैश्विक तकनीक और ऊर्जा के परिदृश्य को बदल सकता है। हाल ही में, उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात की, जिसने एक नई रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी। यह सहयोग डिफेंस, व्यापार और भविष्य की तकनीक के लिए आवश्यक दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में भी विस्तारित होगा।


उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव भारत के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने एस जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में खनन क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग पर जोर दिया गया। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अब समय आ गया है कि हमारे संबंधों को कंस्ट्रक्शन, हेल्थ और डिजिटल सेक्टर से आगे बढ़ाकर खनिजों की खोज तक ले जाया जाए।


खनिजों के क्षेत्र में सहयोग

उज़्बेकिस्तान दुर्लभ खनिजों से समृद्ध है, जो स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और डिफेंस उपकरणों के निर्माण में उपयोग होता है। भारत अब उज़्बेकिस्तान के साथ मिलकर खनिजों के खनन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके अलावा, उज़्बेकी विदेश मंत्री ने भारतीय राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से भी मुलाकात की, जिसमें कृषि, फार्मा, आईटी और खनन में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई।


वर्तमान में, भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच व्यापार लगभग $1 अरब डॉलर है, लेकिन विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह आंकड़ा काफी कम है और इसे कई गुना बढ़ाया जा सकता है।


कनेक्टिविटी और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता

बैठक में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए परिवहन और लॉजिस्टिक्स पर भी चर्चा हुई। भारत ने अफगानिस्तान की 2027-29 की नॉन अलाइनमेंट मूवमेंट की अध्यक्षता का समर्थन किया है। इसके साथ ही, ताशकंद में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी के लिए भारत का सहयोग भी दोहराया गया।


सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को मजबूत करने का संकल्प लिया, जिससे यह संदेश दिया गया कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता आवश्यक है। इस प्रकार, भारत और उज़्बेकिस्तान अब अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए तैयार हैं।