भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सौदे की तैयारी, अमेरिका की बयानबाजी जारी
भारत और फ्रांस के बीच डिफेंस डील की संभावना
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और फ्रांस जैसे सहयोगियों के प्रति कड़े रुख अपनाए हैं। इस बीच, दिल्ली और पेरिस के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा सौदा तैयार हो रहा है, जो वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर सकता है। ट्रंप की बयानबाजी और टैरिफ की धमकियों के बावजूद, भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। भारतीय वायुसेना 114 लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करने की योजना बना रही है, और इस समय फ्रांस के राफेल विमानों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह सौदा केवल विमानों की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह 'मेक इन इंडिया' के तहत होगा। टाटा एडवांस सिस्टम और डसॉल्ट एविएशन के बीच हैदराबाद में राफेल के फ्यूज बनाने का समझौता पहले ही हो चुका है।
भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
इस परियोजना की क्षमता सालाना 24 यूनिट्स बनाने की होगी। भारत का लक्ष्य है कि राफेल की वैल्यू का लगभग 60% हिस्सा देश में ही तैयार किया जाए, जिससे स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा मिले। इसमें हैदराबाद में इंजन उत्पादन योजना और उत्तर प्रदेश के जेवर में एक बड़ा मेंटेनेंस और रिपेयरिंग हब शामिल है। भविष्य में, भारत न केवल अपनी जरूरतों के लिए राफेल बनाएगा, बल्कि वैश्विक ऑर्डर्स की आपूर्ति भी यहीं से की जा सकेगी। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ट्रंप लगातार भारत और फ्रांस पर बयानबाजी कर रहे हैं।
जयशंकर का सफल दौरा और मैक्रों की संभावित यात्रा
विदेश मंत्री जयशंकर के फ्रांस दौरे की चर्चा भी जोरों पर है, जहां उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों से मुलाकात की। इस मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत और फ्रांस की दोस्ती मजबूत बनी रहेगी। अगले महीने, मैक्रों भारत आने वाले हैं, और इस दौरे में कोई बड़ी डील भी हो सकती है। यह स्पष्ट है कि अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के बीच, भारत और फ्रांस के बीच का यह सौदा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।