भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक: पीएम मोदी ने पुतिन को भेंट की तिरुक्कुरल
नई दिल्ली में मोदी-पुतिन की महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने लगभग 45 मिनट तक विचार-विमर्श किया। सूत्रों के अनुसार, इस चर्चा में भारत और रूस के बीच संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की गई। व्यापार, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी विचार किया गया। इसके साथ ही, वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
गर्मजोशी से भरी मुलाकात
बैठक के दौरान पीएम मोदी और पुतिन के बीच गर्मजोशी का माहौल देखने को मिला। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और गले मिले। इस अवसर पर, पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति को तमिल संत तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना 'तिरुक्कुरल' का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भेंट किया।
Presented President Putin with a Russian translation of the Thirukkural, which carries the eternal wisdom of the great Thiruvalluvar across languages and borders. pic.twitter.com/rvk3rRDnvg
— Narendra Modi (@narendramodi) September 11, 2026
तिरुक्कुरल का महत्व
मोदी ने तिरुक्कुरल की पुस्तक सौंपते समय इसके महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह रचना भारत और रूस के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने में सहायक हो सकती है। तिरुवल्लुवर ने इस ग्रंथ में मानव जीवन, नैतिकता और समाज के विभिन्न पहलुओं को सरलता से प्रस्तुत किया है। तिरुक्कुरल को 'तमिल वेद' के रूप में भी जाना जाता है और इसकी रचना लगभग 2,000 साल पहले हुई थी।
आर्थिक सहयोग पर चर्चा
बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, रूस के INNOPROM कार्यक्रम के माध्यम से औद्योगिक सहयोग बढ़ाने, रेलवे और टनलिंग क्षेत्र में साझेदारी, और स्टील वैल्यू चेन को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, फर्टिलाइजर सेक्टर में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल रहे। रूस में भारतीय कुशल श्रमिकों के लिए अवसर बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।
BRICS सम्मेलन का महत्व
दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक व्यापार एवं टैरिफ नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव है। BRICS में 11 देश शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ के मुद्दों को आगे बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।