भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली जनरल धीरज सेठ की यात्रा
नई दिल्ली से रूस की यात्रा का समापन
नई दिल्ली: भारतीय सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रूस में अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा का सफल समापन किया है। यह यात्रा 18 सितंबर को समाप्त हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्षमता विकास, प्रशिक्षण सहयोग, तोपखाने के आधुनिकीकरण और युद्ध अनुभवों का आदान-प्रदान करना था। जनरल सेठ ने रूस के उच्च सैन्य नेतृत्व से मुलाकात की और कई महत्वपूर्ण सैन्य संस्थानों का दौरा किया।
मॉस्को में उप रक्षा मंत्री से महत्वपूर्ण वार्ता
मॉस्को में जनरल सेठ ने रूस के उप रक्षा मंत्री जनरल यूनुस-बेक येवकुरोव से मुलाकात की। इस बातचीत में दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने, पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान और दोनों सेनाओं के बीच तालमेल को बेहतर बनाने पर चर्चा की गई। यह बैठक भारत-रूस के लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
India's Chief of the Army Staff General Dhiraj Seth arrived in Moscow with an official visit. The official goal of his visit is stated as further strengthening India and Russia defense cooperation and military ties. pic.twitter.com/bohzK9NLqT
— Anton Gerashchenko (@Gerashchenko_en) September 18, 2026
सेंट पीटर्सबर्ग में आर्टिलरी अकादमी का दौरा
इसके बाद जनरल धीरज सेठ ने सेंट पीटर्सबर्ग में मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी का दौरा किया। यहां उन्होंने फैकल्टी और अधिकारियों के साथ प्रशिक्षण के नए तरीकों और तोपखाने के आधुनिकीकरण पर विस्तार से चर्चा की। भारतीय सेना अपने तोपखाने को लगातार अपग्रेड कर रही है, इसलिए यह चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की
सेंट पीटर्सबर्ग में जनरल सेठ को एक विशेष सम्मान भी प्राप्त हुआ। ऐतिहासिक पीटर एंड पॉल किले में उन्हें पारंपरिक तोप दागने की रस्म में भाग लेने का अवसर मिला, जो रूस में एक प्रतिष्ठित सम्मान है। इसके अलावा, उन्होंने 'टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर' पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
भारत-रूस के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम
सेना के अधिकारियों के अनुसार, इस यात्रा ने भारत और रूस के बीच गहरे विश्वास और मित्रता को और मजबूत किया है। दोनों देश सैन्य कूटनीति, संस्थागत सहयोग और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस दौरे से भविष्य में दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नई गति मिलने की उम्मीद है।