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भारत और वियतनाम के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी: ब्रह्मोस मिसाइल डील का महत्व

भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हुआ है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल डील महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की वियतनाम यात्रा ने इस साझेदारी को और मजबूत किया है। जानें कैसे यह डील वियतनाम की सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी और चीन को एक स्पष्ट संदेश भेजेगी।
 

भारत की वायुसेना प्रमुख की वियतनाम यात्रा

जब एयर चीफ मार्शल एपी सिंह वियतनाम पहुंचे, तो वह केवल एक मेहमान नहीं थे। उनके साथ ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत और सुखोई विमानों का भरोसा था, जिसने दक्षिण चीन सागर में हलचल पैदा कर दी है। तकनीकी सहयोग डिप्लोमेसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हनोई में होची मिन के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित कर, एयर चीफ ने भारत के वियतनाम के संघर्ष और गौरवशाली इतिहास के प्रति सम्मान को स्पष्ट किया।


असली बातचीत तब शुरू हुई जब वह रेजीमेंट 927 पहुंचे, जो वियतनाम की वायुसेना की रीढ़ है। यहां उन्होंने वियतनामी फाइटर पायलटों से सीधे संवाद किया। वियतनाम भी सुखोई 30 एम का संचालन करता है, और भारत के पास इसका सबसे बड़ा बेड़ा है।


भारत का वियतनाम के साथ रक्षा सहयोग

भारत अब वियतनाम को इन विमानों की प्रशिक्षण और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति में प्रमुख साझेदार बनने जा रहा है। इसका अर्थ है कि वियतनाम के आसमान की सुरक्षा में भारत की तकनीक और ज्ञान शामिल होगा।


एक महत्वपूर्ण सौदा, $629 मिलियन की ब्रह्मोस मिसाइल डील, ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि वियतनाम को सामरिक ताकत प्रदान करने जैसा है। यदि इसे वियतनाम के तटों पर तैनात किया जाता है, तो यह दक्षिण चीन सागर में अवैध घुसपैठ को रोकने में मदद करेगा।


भारत की रणनीति और चीन को संदेश

भारत ने वियतनाम को क्रेडिट ऑफ लाइन यानी लोन भी प्रदान किया है, जिससे वह अपनी रक्षा आवश्यकताओं को पूरा कर सके। यह दोस्ती का प्रतीक है, जिसमें भारत न केवल अपनी सुरक्षा कर रहा है, बल्कि अपने सहयोगियों को भी मजबूत बना रहा है।


चीन अक्सर वियतनाम के समुद्री क्षेत्र पर दावे करता है, और भारत की एंट्री चीन के स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स का एक बड़ा जवाब है। यदि चीन हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश करता है, तो भारत वियतनाम के माध्यम से दक्षिण चीन सागर में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगा। एयर चीफ मार्शल और जनरल गुएन तान कुओं के बीच बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा का उल्लेख बार-बार हुआ, जो बीजिंग को स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अब अकेला नहीं है।


भारत और वियतनाम का ऐतिहासिक संबंध

भारत और वियतनाम का संबंध नया नहीं है। 1954 में, जब वियतनाम फ्रांसीसी शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहा था, तब भारत ने उसका समर्थन किया था।