भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सऊदी अरब का दौरा किया, जहां उन्होंने विदेश मंत्री प्रिंस फैजल बिन फरहान के साथ महत्वपूर्ण वार्ता की। यह मुलाकात भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा, ऊर्जा, और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारतीय समुदाय की सऊदी अरब में बड़ी संख्या भी इन संबंधों को मजबूत बनाती है। जानें इस दौरे के पीछे की रणनीति और दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग के बारे में।
Jul 21, 2026, 19:01 IST
भारत की मध्यपूर्व में सक्रियता
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच, भारत मध्यपूर्व की स्थिति पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस क्रम में, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सऊदी अरब का दौरा किया, जहां उन्होंने विदेश मंत्री प्रिंस फैजल बिन फरहान के साथ महत्वपूर्ण वार्ता की। यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत अपने विश्वसनीय साझेदारों के साथ संपर्क बनाए रखता है। रियाद में हुई इस बैठक में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने यह भी विचार किया कि बदलते हालात में वे एक-दूसरे के साथ कैसे सहयोग कर सकते हैं। बातचीत केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे अरब क्षेत्र की स्थिति, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। यह डोभाल का तीन महीने में दूसरा सऊदी दौरा है, जो भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ती नजदीकी को दर्शाता है।
भारत-सऊदी संबंधों का महत्व
इससे पहले अप्रैल में भी डोभाल ने सऊदी अरब का दौरा किया था, जहां उन्होंने ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की थी। डोभाल का बार-बार सऊदी दौरा इस बात का संकेत है कि भारत इस संबंध को कितना महत्व दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत और सऊदी अरब के बीच संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। पहले, बातचीत केवल तेल व्यापार तक सीमित थी, लेकिन अब सुरक्षा, निवेश और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा है। पिछले साल, दोनों देशों के बीच वीजा छूट का एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य अधिकारियों और प्रतिनिधियों की आवाजाही को सरल बनाना था। सऊदी अरब से कच्चे तेल की आपूर्ति के अलावा, खाड़ी क्षेत्र में शांति बनाए रखना भी भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और व्यापार पर पड़ेगा। यही कारण है कि भारत इस क्षेत्र के देशों के साथ लगातार संपर्क में है।
भारतीय समुदाय का योगदान
सऊदी अरब में भारतीयों की बड़ी संख्या भी दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाती है। लगभग 27 लाख भारतीय वहां निवास करते हैं और काम करते हैं। सऊदी सरकार ने कई बार यह स्वीकार किया है कि भारतीय समुदाय ने उसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ता जा रहा है। हालांकि, पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रक्षा समझौता हुआ था, जिससे ऐसा लगा कि भारत और सऊदी अरब के रिश्तों में दूरी आ सकती है। लेकिन इसके बावजूद, भारत ने सऊदी अरब के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखा है। डोभाल की हालिया यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भारत खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख देश के साथ सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दों पर निकटता बनाए रखता है। इस प्रकार, भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ता संवाद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है। कुल मिलाकर, डोभाल का यह दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी।