भारत और साइपरस के बीच रक्षा सहयोग: तुर्की की चिंता बढ़ी
भारत और साइपरस के बीच हाल ही में हुए रक्षा सहयोग ने तुर्की में बेचैनी पैदा कर दी है। इस समझौते के तहत भारतीय मिसाइलें और ड्रोन पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किए जा सकते हैं। साइपरस अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारत की ओर देख रहा है, जो तुर्की के लिए एक बड़ा सामरिक झटका हो सकता है। जानें इस समझौते के पीछे की रणनीति और इसके संभावित प्रभाव।
May 27, 2026, 16:46 IST
भारत की मिसाइलें भूमध्य सागर में तैनात होने की संभावना
क्या भारतीय मिसाइलें अब भूमध्य सागर की लहरों पर तैनात होने जा रही हैं? क्या भारत का रक्षा उद्योग यूरोप में अपनी पहचान बनाने की दिशा में बढ़ रहा है? ये सवाल तुर्की के मीडिया में जोर-शोर से उठ रहे हैं। भारत और साइपरस के बीच हाल ही में हुई रणनीतिक साझेदारी ने अंकारा से इस्तांबुल तक बेचैनी पैदा कर दी है। तुर्की की प्रमुख मीडिया वेबसाइट टीआर हैबर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत और साइपरस के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत भारतीय मिसाइलें और ड्रोन पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किए जा सकते हैं। हाल ही में साइपस के राष्ट्रपति निकोस ने भारत की आधिकारिक यात्रा की, जहां पीएम मोदी के साथ उनकी बैठक सामान्य कूटनीतिक बातचीत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण थी। दोनों देशों ने अपने पुराने संबंधों को एक नई रणनीतिक साझेदारी में बदल दिया है।
डिफेंस कोऑपरेशन रोड मैप पर हस्ताक्षर
भारत और साइपरस ने 2026 से 2031 तक के लिए एक डिफेंस कोऑपरेशन रोड मैप पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पांच साल की योजना दोनों देशों के बीच सैन्य और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने का कार्य करेगी। टीआर हैबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते का मुख्य अर्थ यह है कि भारतीय रक्षा तकनीक अब उस क्षेत्र में प्रवेश कर रही है, जिसे तुर्की अपना प्रभाव क्षेत्र मानता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साइपरस और भारत के बीच समझौता भारतीय मिसाइलों और ड्रोन को पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात करने की दिशा में है। तुर्की की मीडिया का मानना है कि साइपरस अब अपनी रक्षा आवश्यकताओं के लिए रूस या अन्य देशों के बजाय भारत की ओर देख रहा है। विशेष रूप से, भारतीय ड्रोन तकनीक और मिसाइल प्रणालियों ने साइपरस का ध्यान आकर्षित किया है। यदि यह सच होता है, तो यह भारत के लिए रक्षा निर्यात में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत होगी।
साइपरस की रक्षा जरूरतें और भारत की तकनीक
टीआर हैबर की रिपोर्ट के अनुसार, साइपरस भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा विकसित अत्याधुनिक प्रणालियों में गहरी रुचि दिखा रहा है। इसमें दो प्रमुख चीजें शामिल हैं: पहला मानव रहित हवाई वाहन, जो भारत की ड्रोन तकनीक में हालिया प्रगति को दर्शाता है। निगरानी से लेकर सटीक हमले करने वाले ड्रोन तक, भारत अब एक वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है। दूसरा, मिसाइल तकनीक, जिसमें भारत की आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी तकनीकें शामिल हैं, ने दुनिया का ध्यान खींचा है। टीआर हैबर का दावा है कि इन मिसाइलों की संभावित खरीद पर बातचीत चल रही है।
तुर्की की चिंताएं और भारत की विदेश नीति
अब तुर्की की चिंता का असली कारण समझना जरूरी है। तुर्की और साइपरस के बीच दशकों से विवाद चल रहा है, और तुर्की ने उत्तरी साइपरस पर कब्जा कर रखा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। यदि साइपरस भारत जैसे वैश्विक शक्ति के साथ रक्षा समझौता करता है, तो यह तुर्की के लिए एक बड़ा सामरिक झटका होगा। टीआर हैबर की रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि भारत का यह कदम न केवल रक्षा के लिहाज से, बल्कि भू-राजनीति के दृष्टिकोण से भी तुर्की को चुनौती देने जैसा है। भारत अब उन देशों के साथ सहयोग कर रहा है, जिनका तुर्की के साथ तनाव है। इस प्रकार, यह रिपोर्ट बताती है कि भारत की विदेश नीति अब केवल रक्षात्मक नहीं रह गई है, बल्कि वह सक्रिय रूप से अपने रक्षा उत्पादों के लिए नए बाजार और साझेदार तलाश रही है।