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भारत के नागरिकों पर अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर, 13 की मौत

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष का असर अब भारतीय नागरिकों पर भी पड़ रहा है। इस संघर्ष में 13 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है और 3 अन्य लापता हैं। खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमलों ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। भारत ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सुरक्षित आवाजाही की मांग की है। जानें इस संघर्ष की पृष्ठभूमि और भारत की प्रतिक्रिया के बारे में।
 

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का प्रभाव

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे गंभीर सैन्य संघर्ष का असर अब भारतीय नागरिकों पर भी पड़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक 13 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि 3 अन्य लापता हैं। यह संकट तब उत्पन्न हुआ जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई। सरकारी सूत्रों के अनुसार, ये मौतें 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों के दौरान हुई हैं, जिसने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है.


संघर्ष की पृष्ठभूमि

ये घटनाएँ तब शुरू हुईं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़राइल के सहयोग से ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का ऐलान किया। इसके जवाब में ईरान ने भी हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। इस संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।


भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने जहाजों पर हुए हमलों के खिलाफ अपनी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत स्थिति पर ध्यान दे रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही की मांग कर रहा है। हाल ही में दो कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए, जिनमें 30 भारतीय नाविक सवार थे। एक जहाज पर 12 भारतीय थे, जिसमें से एक की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरे जहाज पर 18 भारतीय क्रू सदस्य थे, जिनमें से नौ गंभीर रूप से घायल हुए हैं।


जायसवाल ने यह भी बताया कि हालिया हमलों में भारतीय नाविकों की संख्या सबसे अधिक रही है, हालांकि उन्होंने कुल संख्या का खुलासा नहीं किया। विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री यातायात की स्वतंत्रता की बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया है।


ट्रंप की घोषणा और संघर्ष की स्थिति

यह बयान राष्ट्रपति ट्रंप की उस घोषणा के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ईरान की नाकेबंदी को फिर से लागू कर रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से 20% सुरक्षा शुल्क लिया जाएगा। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर यह भी कहा कि बढ़ते संघर्ष के बावजूद इस महत्वपूर्ण शिपिंग लेन से अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात खुला रहेगा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में यह वृद्धि 14 जून को हुए संघर्ष-विराम समझौते के टूटने के बाद हुई है।