भारत के पड़ोसी देशों की यात्रा: उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की धार्मिक पहचान
भारत के पड़ोसी देश
भारत के पड़ोस में पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे दो देश हैं। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान ने भारत से स्वतंत्रता प्राप्त की और एक मुस्लिम राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ, जहां हिंदू, सिख और ईसाई अल्पसंख्यक माने गए। पाकिस्तान की जनसंख्या में 85 प्रतिशत मुसलमान हैं। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना रहा, जबकि पाकिस्तान एक मुस्लिम देश बन गया। पाकिस्तान दो भागों में बंटा था: पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान। 16 दिसंबर 1971 को पूर्वी पाकिस्तान ने मुक्ति संग्राम के बाद बांग्लादेश का रूप धारण किया।
धर्मनिरपेक्षता का सफर
हालांकि शुरुआत में पाकिस्तान ने धर्मनिरपेक्षता का पालन किया, लेकिन 1977 से 1979 के बीच कई संविधान संशोधन हुए, जिससे यह एक इस्लामिक गणराज्य बन गया। बांग्लादेश की आजादी के समय, वहां की 85.4 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम थी, जबकि 14 प्रतिशत से अधिक हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक थे। मुस्लिम बहुल देशों में लोकतंत्र होने के बावजूद, धर्मनिरपेक्षता की कमी रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा की। भारत के मानचित्र पर नजर डालें तो ताजिकिस्तान के दाईं ओर किर्गिस्तान और इसके विपरीत दिशा में उज्बेकिस्तान स्थित है। इन देशों की सीमाएं भारत से नहीं मिलतीं, लेकिन इतिहास में इन देशों ने भारत को कई जख्म दिए हैं।
भारत के लिए ऐतिहासिक संदर्भ
1398 में तैमूर लंग ने समरकंद से दिल्ली पर आक्रमण किया, जिससे उत्तर भारत में भारी तबाही हुई। दिल्ली में हजारों मंदिरों को नष्ट किया गया और यह आक्रमण इतिहास में सबसे बर्बर माना जाता है। 1526 में बाबर ने फरगाना घाटी से भारत पर आक्रमण किया और मुगल साम्राज्य की नींव रखी।
उज्बेकिस्तान का धार्मिक इतिहास
उज्बेकिस्तान में लंबे समय तक इस्लामिक शासकों का राज रहा। 8वीं शताब्दी में अरबों ने इस क्षेत्र को जीता और इस्लाम का प्रचार किया। 9वीं से 10वीं सदी के बीच समानिद वंश का शासन रहा, जिसमें बुखारा इस्लामी शिक्षा का केंद्र बना।
किर्गिस्तान की धार्मिक पहचान
किर्गिस्तान में इस्लाम का प्रभाव उज्बेकिस्तान की तुलना में देर से फैला। 10वीं से 12वीं सदी में कराखानिद वंश के दौरान इस्लाम का प्रसार शुरू हुआ, लेकिन कई जनजातियों ने इसे स्वीकार नहीं किया। 18वीं से 19वीं सदी में कोकंद खानते के अधीन आने के बाद भी इस्लाम का प्रभाव सीमित रहा।
धर्मनिरपेक्षता की दिशा में कदम
1991 में स्वतंत्रता के बाद किर्गिस्तान ने भी खुद को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया। पहले राष्ट्रपति अस्करबेक अकायेव ने धर्मनिरपेक्ष शासन को आगे बढ़ाया। हालांकि, अब एक तबका शरिया के पक्ष में है, लेकिन राज्य की नीतियां इस्लामिक शासन के खिलाफ हैं।