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भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत: शी जिनपिंग का दौरा और हवाई सेवाओं की बहाली

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगभग सात साल बाद भारत की यात्रा पर आ रहे हैं, जिसमें वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरे के साथ नई दिल्ली और ग्वांगझोऊ के बीच हवाई सेवा का पुनरारंभ भी हो रहा है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार का संकेत है। जानें इस यात्रा और हवाई सेवा के महत्व के बारे में।
 

शी जिनपिंग का भारत दौरा


नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगभग सात वर्षों के बाद भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। उनके आगमन को लेकर कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। वे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। इस बीच, भारत-चीन संबंधों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर आई है। नई दिल्ली और ग्वांगझोऊ के बीच हवाई सेवा, जो लगभग छह साल से बंद थी, अब फिर से शुरू होने जा रही है।


हवाई सेवा का पुनरारंभ

चाइना सदर्न एयरलाइंस ने यह घोषणा की है कि नई दिल्ली और ग्वांगझोऊ के बीच विमान सेवा 21 सितंबर से पुनः प्रारंभ होगी। एयरलाइन के अनुसार, सेवा के प्रारंभिक सप्ताह में लगभग 100 उड़ानों का संचालन किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच सीधी हवाई कनेक्टिविटी में वृद्धि होगी।


हवाई संपर्क में सुधार

नई दिल्ली और ग्वांगझोऊ के बीच उड़ानें शुरू होने से भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क और मजबूत होने की संभावना है। इससे पहले, नई दिल्ली से बीजिंग के लिए विमान सेवा अप्रैल में बहाल की गई थी। इसके अतिरिक्त, 18 अप्रैल से कोलकाता और कुनमिंग के बीच भी सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो चुकी हैं। ग्वांगझोऊ सेवा की बहाली को दोनों देशों के बीच सामान्य होते संबंधों की दिशा में एक और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।


गलवान झड़प के बाद के तनाव

भारत और चीन के बीच संबंधों में तनाव तब बढ़ा जब गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई। इसके बाद सीमा पर तनाव बना रहा, लेकिन कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के बाद पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती कम हुई और संबंधों में सुधार के संकेत दिखने लगे।


शी जिनपिंग की भारत यात्रा और मोदी के साथ उनकी बातचीत को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


प्रतिनिधिमंडल का आकार

शी जिनपिंग अपने दौरे पर एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ आएंगे, जिसमें उनके करीबी सहयोगी काई ची भी शामिल हैं। काई ची चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य हैं। इसके अलावा, चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे। रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल में लगभग 400 सदस्य हो सकते हैं।


चीन का सकारात्मक संकेत

PM मोदी और जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि कजान और तियानजिन में हुई पिछली मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरी बार होगी।


उन्होंने यह भी कहा कि चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के अनुसार भारत के साथ सहयोग करना चाहता है। बीजिंग ने संवाद बढ़ाने, सहयोग को मजबूत करने और मतभेदों को उचित तरीके से संभालने पर जोर दिया है। चीन ने दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी और एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाले साझेदार के रूप में आगे बढ़ने की बात भी कही।