भारत ने UN में पाकिस्तान को दिया करारा जवाब, सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर
भारत का कड़ा संदेश
नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मंच पर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और उनके ढांचों की समय-समय पर समीक्षा करना आवश्यक है। भारत ने कहा कि पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता की व्यवस्थाओं को वर्तमान वैश्विक परिदृश्यों के अनुसार परखना चाहिए, क्योंकि बदलते भू-राजनीतिक हालात में हर व्यवस्था हमेशा प्रासंगिक नहीं रह सकती।
राजदूत पर्वथानेनी हरीश का बयान
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने UNSC की 'एरिया फॉर्मूला' बैठक में भारत का पक्ष रखा। इस बैठक की सह-अध्यक्षता चीन और पाकिस्तान कर रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर VI और चैप्टर VII के अंतर्गत पारित प्रस्तावों के बीच महत्वपूर्ण अंतर को स्पष्ट किया।
राजदूत हरीश ने बताया कि चैप्टर VII के तहत पारित प्रस्ताव उन परिस्थितियों से संबंधित होते हैं जहां अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा होता है। ऐसे मामलों में सुरक्षा परिषद को ठोस कदम उठाने का अधिकार होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन प्रस्तावों के अनुपालन में कमी आने से वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
चैप्टर VI और VII के बीच का अंतर
इसके विपरीत, चैप्टर VI के तहत प्रस्ताव विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बनाए जाते हैं, जिसमें बातचीत, मध्यस्थता, सुलह और पंचाट जैसे उपाय शामिल होते हैं। भारत ने कहा कि ऐसे प्रस्ताव हमेशा के लिए अपरिवर्तनीय नहीं होते और इन्हें समय की राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार तैयार किया जाता है।
फिलिस्तीन का उदाहरण
भारत ने लंबे समय से लंबित अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का जिक्र करते हुए फिलिस्तीन का उदाहरण दिया और कहा कि समय के साथ वहां की परिस्थितियां बदलने पर समाधान के तौर-तरीकों में भी बदलाव किए गए हैं। इसी आधार पर भारत ने संकेत दिया कि पुराने मध्यस्थता ढांचों और प्रस्तावों की समीक्षा की जानी चाहिए।
जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की टिप्पणी
बैठक के दौरान पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। राजदूत हरीश ने कहा कि पाकिस्तान ने मंच का राजनीतिक उपयोग करने की कोशिश की है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है और इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र में चल रहे सुधार प्रयासों के तहत सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और व्यवस्थाओं की समीक्षा होनी चाहिए, ताकि वे वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बने रहें। भारत का मानना है कि समयानुकूल सुधार ही अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता को मजबूत कर सकते हैं।