भारत ने चीन की भू-राजनीतिक चालों को किया बेनकाब, भूटान पर बढ़ा दबाव
भारत ने चीन की भू-राजनीतिक चालों को बेनकाब करते हुए भूटान पर बढ़ते दबाव का खुलासा किया है। पूर्व विदेश सचिव कमल सिबल ने चीन की नक्शा नीति और उसके प्रभावों पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि कैसे चीन भूटान के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के बहाने भारत के साथ उसके पुराने संबंधों को तोड़ने की कोशिश कर रहा है। जानें इस मुद्दे की गहराई और भारत की नई रणनीतियों के बारे में।
Aug 11, 2026, 14:16 IST
चीन की नक्शा नीति का खुलासा
अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम बदलने के प्रयास के साथ चीन ने सोचा कि वह इतिहास को बदल सकता है। लेकिन भारत ने उसे करारा जवाब दिया है। पूर्व विदेश सचिव कमल सिबल ने बीजिंग की इस काल्पनिक रणनीति को नकारते हुए बताया है कि यह केवल भारत के खिलाफ नहीं, बल्कि भूटान को भी अपने प्रभाव में लाने की कोशिश है। सिबल ने 'कार्टोग्राफिक टेरिटोरियल एक्सपेंस निज्म' शब्द का उपयोग करते हुए चीन की इस चाल को घातक बताया। चीन सीधे युद्ध के बजाय मानसिक खेल खेलता है, पुराने और मनगढ़ंत नामों का इस्तेमाल कर धीरे-धीरे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की कोशिश करता है। सिबल ने यह भी बताया कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय रुख अपनाने लगा है। सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नामों को मानकीकृत करना यह सुनिश्चित करता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जाएगा। यह चीन की नामकरण राजनीति पर एक बड़ा प्रहार है, जिससे वह उबर नहीं पाएगा।
भूटान पर चीन का दबाव
क्या भूटान है चीन की अगली भूख?
चीन भूटान के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के बहाने उसकी रणनीतिक चोटियों और चारागाहों पर दावा कर रहा है। सिबल के अनुसार, चीन भूटान को डराकर भारत के साथ उसके पुराने संबंधों को तोड़ना चाहता है। चीन का उद्देश्य भूटान की भूमि के माध्यम से भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर दबाव बनाना है। सिबल ने चेतावनी दी है कि चीन की महत्वाकांक्षाएं केवल लद्दाख या अरुणाचल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह पूरे हिमालय क्षेत्र को अपने प्रभाव में लेना चाहता है। उन्होंने यह भी बताया कि 1950 से पहले भारत और चीन के बीच कोई सीमा समझौता नहीं था, और भारत ने तिब्बत पर चीन के नियंत्रण को स्वीकार किया था ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे। लेकिन अब चीन इस उदारता का फायदा उठाकर भारत की अतिरिक्त भूमि मांग रहा है।
चीन के तर्कों की कमजोरी
चीन का खोखला तर्क
कमल सिबल ने सीधे सवाल उठाया कि तिब्बत के बाद चीन कहां रुकेगा। जब चीनी विशेषज्ञों ने भारत के इस कदम को भ्रम कहा, तो यह उनकी बौखलाहट को दर्शाता है। चीन का कहना है कि इससे रिश्तों में सुधार की कोशिश को नुकसान होगा, लेकिन सिबल का जवाब है कि दरार चीन के घुसपैठ और फर्जी दावों से आई है। उनका विश्लेषण यह दर्शाता है कि भारत अब चीन की ब्लैकमेलिंग कूटनीति में नहीं आएगा। यदि चीन नाम बदलेगा, तो भारत अपनी पहचान को और मजबूती से स्थापित करेगा। चीन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह भूटान पर दबाव नहीं बना सकता, क्योंकि भूटान की सुरक्षा भारत के हाथों में है।
चिकन नेक की सुरक्षा
चिकन नेक की सुरक्षा और नई कनेक्टिविटी
चीन को यह डर है कि वह भूटान पर सैन्य दबाव नहीं बना सकता, क्योंकि भारत तुरंत हस्तक्षेप करेगा। यही कारण है कि चीन भूटान को अपने प्रभाव में लेकर भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक पहुंचना चाहता है। लेकिन भारत ने इसे विफल करने के लिए भूटान में विकास कार्य शुरू कर दिए हैं। भारत और भूटान के बीच पहली रेलवे लिंक का निर्माण शुरू हो चुका है, जो न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि युद्ध की स्थिति में भारतीय सेना की पहुंच को भी तेज करेगा। सीमा सड़क संगठन भूटान में बेहतरीन सड़कों का निर्माण कर रहा है, जिससे चीन की रणनीति पूरी तरह से विफल हो रही है।