भारत ने नेपाल को 18 घंटे बिजली सप्लाई करने का निर्णय लिया
नेपाल को भारत की बिजली सहायता
हाल ही में नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बिजली उत्पादन और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। इस संकट के समाधान के लिए भारत ने नेपाल को बिजली सप्लाई बढ़ाने का निर्णय लिया है। भारत ने 31 दिसंबर 2026 तक नेपाल को प्रतिदिन 18 घंटे बिजली निर्यात करने की अनुमति दी है, जो 13 सितंबर से लागू होगी। इस व्यवस्था के तहत भारत नेपाल को अधिकतम 654 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम होगा। बिजली की आपूर्ति दो प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से की जाएगी।
नेपाल की बिजली व्यवस्था पर बाढ़ का प्रभाव
अगस्त के अंत में आई भीषण बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं ने नेपाल के कई क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई। इस बाढ़ ने कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को प्रभावित किया, जिससे नेपाल की बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आई। बाढ़ के कारण बागमती क्षेत्र की हाइड्रोपावर क्षमता को लगभग 431 मेगावाट का नुकसान हुआ है, जो कि कुल उत्पादन क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत है।
बिजली सप्लाई के लिए प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनें
भारत से नेपाल को बिजली देने के लिए पहली प्रमुख लाइन मुजफ्फरपुर-ढल्केबर 400 केवी डी/सी लाइन है, जिसके माध्यम से नेपाल को अधिकतम 600 मेगावाट बिजली दी जा सकेगी। यह लाइन भारत और नेपाल के बीच बिजली व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
दूसरी ट्रांसमिशन लाइन टनकपुर-महेंद्रनगर 132 केवी एस/सी लाइन है, जिसके जरिए नेपाल को अधिकतम 54 मेगावाट बिजली भेजने की अनुमति है। दोनों लाइनों की अधिकतम क्षमता मिलाकर नेपाल को कुल 654 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है।
नई व्यवस्था के तहत बिजली सप्लाई
नई व्यवस्था के अनुसार, नेपाल को प्रतिदिन 18 घंटे बिजली दी जाएगी। यह व्यवस्था 13 सितंबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। रिपोर्टों के अनुसार, बिजली की सप्लाई मुख्य रूप से दिन के समय की जाएगी, जिसमें रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। जनवरी 2027 में बिजली की मात्रा का निर्धारण अभी बाकी है, और भारत के बिजली मंत्रालय द्वारा दिसंबर 2026 में मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।