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भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष पर चिंता जताई, सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर

भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को गंभीर चिंता का विषय बताया है। सऊदी अरब के हवाई अड्डों और वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए, भारत ने क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय राजदूत ने कहा कि नाविकों की सुरक्षा प्राथमिकता है और संघर्ष को बातचीत के माध्यम से हल करने की आवश्यकता है। जानें इस मुद्दे पर भारत के कूटनीतिक प्रयास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए उनकी प्रतिबद्धता।
 

भारत की चिंता और सुरक्षा की अपील

भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को 'बेहद चिंताजनक' बताया है और सऊदी अरब के हवाई अड्डों, वाणिज्यिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने बृहस्पतिवार को सुरक्षा परिषद की बहस में कहा कि इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


उन्होंने कहा, 'पश्चिम एशिया के लोगों को सामान्य स्थिति और स्थायी शांति की आवश्यकता है। शांति का अर्थ केवल युद्ध का न होना नहीं है।'


क्षेत्र की स्थिरता और लोगों की सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है। भारत उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे दुनिया अधिक सुरक्षित और समृद्ध बन सके।


पर्वतनेनी ने कहा कि हाल के दिनों में नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की, जिसमें भारतीय नागरिक मोहम्मद यूसुफ अली की भी जान गई।


उन्होंने कहा, 'भारत सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की सरकार और जनता के साथ खड़ा है।'


भारत ने संघर्ष को तुरंत रोकने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमले बंद होने चाहिए।


अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, समुद्री व्यापार का सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।


पर्वतनेनी ने कहा कि नाविकों की सुरक्षा भारत सरकार की प्राथमिकता है और बार-बार हो रहे हमलों से स्थिति और बिगड़ने का खतरा है।


उन्होंने सुरक्षा परिषद में कहा कि हाल में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमले चिंताजनक हैं, जिनमें भारतीय ध्वज वाले जहाज भी शामिल हैं।


भारतीय राजदूत ने इन हमलों के दौरान नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में ओमान और यूएई के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।


भारत और लाइबेरिया ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र में 'जहाजरानी और नाविकों की सुरक्षा पर मित्र देशों का समूह' बनाया था।


पर्वतनेनी ने बताया कि इस पहल में 23 सदस्य देश शामिल हुए हैं, जो हमलों को रोकने और नाविकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सहयोग देने के लिए तैयार हैं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन में 'नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क' स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था।


यह नेटवर्क संबंधित देशों के समुद्री अधिकारियों और दूतावासों को जोड़ सकता है और संकट के समय सहायता प्रदान कर सकता है।


यमन के मुद्दे पर भारत ने देश की एकता और संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप को खारिज किया।


भारत ने यह भी कहा कि वाणिज्यिक पोतों और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट के बीच गाजा पट्टी में चल रहे मानवीय संकट पर ध्यान नहीं भटकना चाहिए।


पर्वतनेनी ने कहा, 'आतंकवाद को कहीं भी उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारत ने 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों की निंदा की थी।'


उन्होंने कहा, 'भारत मानवीय राहत, संवाद और कूटनीति के माध्यम से द्वि-राष्ट्र समाधान के पक्ष में खड़ा रहेगा।'