भारत ने पाकिस्तान और चीन को दिया करारा जवाब, कश्मीर पर उठे सवाल
पाकिस्तान ने चीन में कश्मीर का मुद्दा उठाया, लेकिन भारत ने उसे करारा जवाब दिया। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने सीपीईसी पर भी चिंता जताई, यह कहते हुए कि यह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है। जानें इस मुद्दे पर भारत का क्या कहना है और पाकिस्तान-चीन के संयुक्त बयान का क्या असर हो सकता है।
May 28, 2026, 15:00 IST
पाकिस्तान का कश्मीर मुद्दे पर नया राग
पाकिस्तान ने चीन की धरती पर बैठकर एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया। उसने सोचा कि बीजिंग का समर्थन लेकर भारत पर दबाव बना सकेगा। लेकिन इस बार नई दिल्ली ने ऐसा जवाब दिया कि चीन और पाकिस्तान दोनों चुप हो गए। आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान, जो विश्वभर से कर्ज मांगकर अपने देश का संचालन कर रहा है, चीन पहुंचते ही भारत के खिलाफ बयानबाजी करने लगा। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं और हमेशा रहेंगे। इसके साथ ही, भारत ने चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट सीपीईसी पर भी सीधा हमला किया, यह याद दिलाते हुए कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरने वाले सभी प्रोजेक्ट भारत की संप्रभुता पर हमला माने जाएंगे।
शहबाज शरीफ का चीन दौरा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ 23 से 26 मई तक चीन के दौरे पर थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाया गया। लेकिन असली उद्देश्य भारत के खिलाफ माहौल बनाना था। चीन और पाकिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी किया जिसमें पाकिस्तान ने चीन को जम्मू कश्मीर की स्थिति पर जानकारी दी। इसके बाद चीन ने भी वही पुरानी बातें दोहराईं, कश्मीर को एक ऐतिहासिक विवाद बताते हुए यूएन चार्टर और यूएससी प्रस्तावों का उल्लेख किया। लेकिन शायद चीन और पाकिस्तान यह भूल गए थे कि यह नया भारत है। भारत ने तुरंत इस बयान को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत के अविभाज्य हिस्से हैं और इस पर किसी अन्य देश को टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
सीपीईसी पर भारत का कड़ा रुख
भारत ने सीपीईसी पर भी कड़ा रुख अपनाया। उसने कहा कि सीपीईसी के कई प्रोजेक्ट्स भारत के उस क्षेत्र से गुजरते हैं, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है। गिलगिट, बलूचिस्तान और पीओके से गुजरने वाले इस प्रोजेक्ट को भारत ने पूरी तरह से अवैध करार दिया।
सीपीसी का महत्व
सीपीसी चीन का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जो लगभग 60 बिलियन डॉलर का है। यह चीन के शीजियांग को पाकिस्तान के गवादर पोर्ट से जोड़ता है, जिससे चीन अरब सागर तक सीधी पहुंच बनाना चाहता है। इसके तहत सड़क, रेलवे, बंदरगाह और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के माध्यम से क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की योजना है। लेकिन भारत लगातार यह कहता आया है कि सीपीईसी भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा भारत के वैध क्षेत्र पीओके से होकर गुजरता है। इसके अलावा, भारत ने चीन-पाकिस्तान के कथित सीमा पार जल सहयोग पर भी सवाल उठाए। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि जब चीन और पाकिस्तान की कोई वैध साझा सीमा नहीं है, तो सीमा पार जल सहयोग कैसे संभव है? भारत ने 1963 के उस विवादास्पद चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को भी खारिज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान ने कश्मीर की एक घाटी का हिस्सा चीन को सौंपा था।