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भारत ने बांग्लादेश में अधिकारियों के परिवारों को लौटने की सलाह दी

भारत ने बांग्लादेश में तैनात अपने अधिकारियों के परिवारों को सुरक्षा चिंताओं के चलते घर लौटने की सलाह दी है। यह निर्णय आगामी संसदीय चुनावों से पहले लिया गया है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने वाले हैं, जो पिछले विद्रोह के बाद पहला चुनाव होगा। इस कदम ने बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है और विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुरक्षा स्थिति को देखते हुए उठाया गया है। जानें इस निर्णय के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

भारत का एहतियाती कदम

भारत ने मंगलवार को बांग्लादेश में तैनात अपने अधिकारियों के परिवारों को सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर घर लौटने की सलाह दी है। यह निर्णय आगामी संसदीय चुनावों से पहले लिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम सुरक्षा उपायों के तहत उठाया गया है और इससे बांग्लादेश में भारतीय राजनयिक मिशनों के कार्यों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, "सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, हमने दूतावास और उसके अधिकारियों के परिवारों को भारत लौटने की सलाह दी है।" उन्होंने यह भी बताया कि ढाका में भारतीय उच्चायोग और अन्य सभी भारतीय दूतावास पूरी तरह से कार्यरत हैं और राजनयिक सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं।


बांग्लादेश में चुनावों की तैयारी

इस बीच, विदेश मंत्रालय की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने वाले हैं, जो 2024 में हुए विद्रोह के बाद पहला चुनाव होगा, जिसने शेख हसीना की सरकार को गिरा दिया था। अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह ने हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया था, जिसके बाद से देश राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस, जो प्रदर्शनकारियों के अनुरोध पर निर्वासन से लौटकर "मुख्य सलाहकार" के रूप में कार्यवाहक प्रशासन का नेतृत्व कर रहे थे, आम चुनावों के बाद अपने पद से इस्तीफा देंगे।


परिवारों की वापसी की प्रक्रिया

बांग्लादेश में तैनात भारतीय अधिकारियों को सूचित किया गया है कि उनके परिवारों को 8 जनवरी तक भारत लौटना होगा। जिन अधिकारियों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, उन्हें इसके लिए अतिरिक्त 7 दिन का समय दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप, पिछले गुरुवार, 15 जनवरी तक ढाका, चटगांव, खुलना, सिलहट और राजशाही में स्थित भारतीय मिशनों में तैनात अधिकारियों के परिवारों को कम समय में भारत लौटना पड़ा। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस निर्णय के बारे में कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। इस कदम ने बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है और यूनुस की योजनाओं को विफल कर दिया है, क्योंकि चुनाव से पहले कट्टरपंथी वामपंथी समूह सक्रिय हैं।


भारत का सुरक्षा उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले सुरक्षा स्थिति के बिगड़ने की आशंकाओं के कारण उठाया गया है। भारत ने पहले ही खतरे की आहट को भांप लिया और यूनुस की साजिश को नाकाम करने के लिए यह निर्णय लिया।