भारत ने श्रीलंका को टीबी दवाइयों की आपूर्ति की, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम
भारत की सहायता से टीबी के खिलाफ लड़ाई
भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने श्रीलंका के स्वास्थ्य और जनसंचार मंत्री नलिनदा जयतिस्सा को टीबी (तपेदिक) के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयों की एक खेप सौंपी। यह खेप बुधवार को प्रदान की गई। संतोष झा ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि वे टीबी के खिलाफ लड़ाई में श्रीलंका के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, "आज मैंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नलिनदा जयतिस्सा को 3 टन टीबी-रोधी दवाइयों की आपूर्ति की।" ये दवाइयाँ श्रीलंका में टीबी के उपचार और रोकथाम में सहायक होंगी, जिससे देश की टीबी से निपटने की क्षमता में सुधार होगा।
इससे पहले, 28 सितंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया था कि भारतीय वायु सेना के विमान द्वारा कोलंबो को टीबी-रोधी दवाइयाँ भेजी गई हैं। उन्होंने श्रीलंका के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। जयशंकर ने कहा, "भारत श्रीलंका की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।"
नई स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास
इसके अतिरिक्त, 16 सितंबर को श्रीलंका के मन्नार में डिस्ट्रिक्ट जनरल हॉस्पिटल में एक नई दो-मंजिला एक्सीडेंट और इमरजेंसी यूनिट के निर्माण का कार्य आरंभ हुआ। इस परियोजना के लिए भारत सरकार ने आर्थिक सहायता प्रदान की है। आधारशिला रखने के कार्यक्रम में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, नलिनदा जयतिस्सा और संतोष झा शामिल हुए। यह पहल 600 मिलियन श्रीलंकाई रुपये (SLR) की भारतीय ग्रांट से समर्थित है।
हाई कमिश्नर झा ने सोशल मीडिया पर लिखा, "हेल्थकेयर को मजबूत करना, जानें बचाना!" मन्नार के डिस्ट्रिक्ट जनरल हॉस्पिटल में नई इमरजेंसी यूनिट की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और स्वास्थ्य मंत्री नलिनदा जयतिस्सा के साथ उपस्थित होकर उन्होंने खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आवश्यक चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध कराएगी, जिससे गंभीर 'गोल्डन आवर' के दौरान समय पर इमरजेंसी देखभाल सुनिश्चित हो सकेगी।