भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का लिया कड़ा निर्णय
भारत ने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के जवाब में सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह कदम तब तक लागू रहेगा जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समाप्त नहीं करता। 1960 में हुई इस ऐतिहासिक संधि का वर्तमान में क्या प्रभाव है, जानें इस लेख में।
Jun 5, 2026, 16:42 IST
भारत का स्पष्ट संदेश: आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम
भारत ने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश दिया है कि सिंधु जल संधि (IWT) तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक पड़ोसी देश आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त नहीं कर देता। 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत के दृढ़ रुख को दोहराते हुए कहा कि देश को अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने का अधिकार है, क्योंकि आतंकवाद पाकिस्तान की राज्य नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए एक घातक आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया था। 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई यह जल-बंटवारा संधि अब पाकिस्तान के आतंकवादी गतिविधियों के कारण ठप हो गई है।
विदेश मंत्रालय का बयान: आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्थिति
विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के कारण सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी। 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को सीमा पार से आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, "दुनिया जानती है कि सीमा पार आतंकवाद पाकिस्तान की राज्य नीति का एक हथियार रहा है।" मंत्रालय ने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि तब तक लागू नहीं होगी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं कर देता।
सिंधु जल संधि का इतिहास और वर्तमान स्थिति
भारत और पाकिस्तान के बीच जल-बंटवारे के समझौते, सिंधु जल संधि (IWT) पर 19 सितंबर, 1960 को हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि में सिंधु नदी प्रणाली की तीन पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास और सतलुज) और तीन पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम और चिनाब) शामिल हैं। संधि के अनुसार, भारत सिंधु प्रणाली के कुल जल का लगभग 20% नियंत्रित करता है, जबकि पाकिस्तान को लगभग 80% मिलता है। 23 अप्रैल को विदेश मंत्रालय ने कई सख्त उपायों की घोषणा की, जिसमें सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करना भी शामिल है। यह संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मौजूदगी में हुई थी। अब जब भारत ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने का निर्णय लिया है, तो पहला कदम सिंधु जल संधि को निलंबित करना है। पाकिस्तान की 80 प्रतिशत खेती और 30 प्रतिशत पावर प्रोजेक्ट सिंधु जल पर निर्भर हैं, जिससे पानी रुकने पर पाकिस्तान की स्थिति गंभीर हो गई है।