भारत-पाकिस्तान जल विवाद: मुसादिक मलिक की चेतावनी और संधि पर तनाव
भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद की नई परत
नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद एक बार फिर से उभर आया है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को सख्त चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के हिस्से के जल पर दावा करने की कोशिश करेगा, तो 'उन हाथों को काट देंगे।' यह बयान तब आया है जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया है।
पाकिस्तान के आरोप और भारत का जवाब
पाकिस्तान ने भारत पर लगाए आरोप
इस्लामाबाद में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुसादिक मलिक ने कहा कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के जल को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और यदि उसके हिस्से के जल में हस्तक्षेप किया गया, तो इसका गंभीर परिणाम होगा।
پاکستان پہلے ہی واضح کر چکا ہے کہ اگر کسی نے ہمارے پانی پر ہاتھ ڈالنے کی کوشش کی تو اسے بھرپور جواب دیا جائے گا
— Kippsam Malik (@KeepsamM) June 29, 2026
ہم دوٹوک اعلان کر چکے ہیں کہ جو ہمارے پانی پر ہاتھ ڈالے گا ہم وہ ہاتھ کاٹ دیں گے
ہم نے پہلے ہوا میں پکڑ کر ٹھوکا ہے اب نیچے سے بھی ٹھوکیں گے ۔ مصدق ملک pic.twitter.com/l4q4XfmpsN
सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भी कहा कि सिंधु जल संधि आज भी पूरी तरह से लागू है और इसे कोई भी देश एकतरफा तरीके से निलंबित या समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है।
सिंधु जल संधि पर बढ़ता तनाव
सिंधु जल संधि पर बढ़ा तनाव
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि के तहत भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का अधिकार मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश जल पाकिस्तान के हिस्से में जाता है। यह समझौता कई युद्धों और तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद अब तक कायम रहा है।
हालांकि, अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को प्रभावी तरीके से रोकने के ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक इस संधि पर आगे बढ़ना संभव नहीं है।
भारत का दृष्टिकोण
भारत ने संधि पर रखा अपना पक्ष
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट किया है कि 1960 में बनी यह संधि वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं रह गई है। भारत का कहना है कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है, वह सहयोग और विश्वास पर आधारित समझौतों के विशेष अधिकारों की उम्मीद नहीं कर सकता।
इस बीच, पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बढ़ती बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में जल विवाद और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।