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भारत में BRICS विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी

भारत में BRICS विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी चल रही है, जिसमें उज़्बेकिस्तान का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचा है। यह बैठक 14 और 15 मई को होगी, और इसका उद्देश्य वैश्विक कूटनीति में सामूहिक सहमति बनाना है। इस दौरान, विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। जानें इस बैठक का महत्व और इसके पीछे की चुनौतियाँ।
 

BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक का महत्व

भारत एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनता नजर आ रहा है, क्योंकि BRICS विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक के लिए उज़्बेकिस्तान का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली पहुंचा है। उप विदेश मंत्री अलोयेव बखरॉमजोन जोराबोयेविच का आगमन, दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों का संकेत है।


इस अवसर पर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस गणमान्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि वे ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने आए हैं।


बैठक की पृष्ठभूमि और चुनौतियाँ

नई दिल्ली में 14 और 15 मई को होने वाली इस बैठक के दौरान, BRICS समूह की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विदेश मंत्री एकत्रित होंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ रहा है, विशेषकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण।


इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह समूह की सामूहिक कूटनीति की क्षमता को परखने का एक अवसर है। विदेश मंत्री एस जयशंकर इस दो-दिवसीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे।


कूटनीतिक मेलजोल का महत्व

यह शिखर सम्मेलन BRICS के सदस्य देशों और सहयोगियों के लिए अपने रणनीतिक हितों को साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। भारत इस गठबंधन को महत्व देता है, और प्रतिनिधिमंडल के सदस्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।