भारत में रूसी तेल का आगमन: Aqua Titan टैंकर ने बदला रुख
रूसी तेल का टैंकर भारत पहुंचा
नई दिल्ली: रूस से कच्चा तेल लेकर जा रहा एक विशाल टैंकर अचानक अपना मार्ग बदलकर भारत की ओर बढ़ गया है। यह टैंकर, जिसे 'एक्वा टाइटन' (Aqua Titan) कहा जाता है, न्यू मंगलौर पोर्ट (कर्नाटक) पर पहुंच चुका है। यह पहला ऐसा जहाज है, जिसने कम से कम सात अन्य टैंकरों को भी भारत की दिशा में मोड़ दिया है। इस घटना ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है।
रूट परिवर्तन का कारण और समय
एक्वा टाइटन ने जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के प्रिमोर्स्क पोर्ट से यात्रा शुरू की थी। इसका प्राथमिक गंतव्य चीन का रिजाओ पोर्ट था, लेकिन मार्च के मध्य में इसने दक्षिण चीन सागर में यू-टर्न लिया और भारत की ओर बढ़ गया। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह परिवर्तन 6 मार्च को अमेरिका द्वारा दिए गए 30 दिनों के अस्थायी वेवर के बाद हुआ।
इस वेवर ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी, जिससे भारतीय रिफाइनरियों ने तेजी से खरीदारी शुरू की और एक हफ्ते में लगभग 3 करोड़ बैरल रूसी क्रूड खरीदा गया।
होर्मुज संकट और भारत की ऊर्जा सुरक्षा
पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ है, जिससे भारत का 40-50 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है। एलएनजी और एलपीजी की भी बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है। जहाजों में देरी और रुकावट से ऊर्जा आपूर्ति पर संकट उत्पन्न हो गया था। ऐसे में रूसी तेल का भारत पहुंचना एक वैकल्पिक और सस्ता विकल्प बन गया है।
एक्वा टाइटन में लगभग 7.7 लाख बैरल (1.1 लाख टन) उराल्स क्रूड है, जिसे मंगलौर रिफाइनरी (MRPL) के लिए चार्टर किया गया था। इसी तरह, सूजमैक्स टैंकर 'जुजु एन' (Zouzou N) भी मार्च के अंत तक गुजरात के सिक्का पोर्ट पहुंच सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम सात टैंकरों ने बीच रास्ते में चीन से मुंह मोड़ लिया है। भारत ने रूसी तेल के आयात को तेज कर दिया है, जो मार्च में 1.5-2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। इससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल रही है।
ऊर्जा संकट में महत्वपूर्ण बदलाव
यह कदम भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो रहा है। जब पारंपरिक मार्ग प्रभावित होते हैं, तब रूस जैसे स्रोत से सस्ता और सुरक्षित तेल मिलना राहत प्रदान कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की ऊर्जा नीति की मजबूती को दर्शाता है। वर्तमान में स्थिति पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन रूसी तेल की यह खेप संकट के बीच बड़ी उम्मीद जगाती है।