भारत सरकार की राहत: होर्मुज में फंसे सभी 22 भारतीय जहाज सुरक्षित
भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका, और इजराइल के बीच संघर्ष के बीच, भारत सरकार ने एक सकारात्मक सूचना साझा की है। होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे सभी 22 भारतीय जहाज और उन पर सवार 611 नाविक पूरी तरह से सुरक्षित हैं। सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही है।
सरकारी अपडेट का विवरण
विदेश मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय ने एक संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी साझा की। सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित है। पिछले 24 घंटों में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। कुछ भारतीय जहाजों को पहले ही सुरक्षित निकाल लिया गया है, और दो एलपीजी टैंकर, शिवारिक और नंदा देवी, होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ये गुजरात के बंदरगाहों की दिशा में जा रहे हैं।
ईरान के साथ अदला-बदली की अफवाहों का खंडन
कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि ईरान ने भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने के बदले में भारत द्वारा फरवरी में जब्त किए गए तीन टैंकरों की रिहाई की मांग की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए कहा, “इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है।”
जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि ये तीनों जहाज ईरान के स्वामित्व में नहीं हैं और न ही ये ईरानी जहाज हैं। भारत ने इन्हें पहचान छिपाने और समुद्र में अवैध तेल ट्रांसफर में संलिप्तता के आरोप में जब्त किया था।
होर्मुज में जहाजों की स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण जल मार्ग है, जिसके माध्यम से भारत का बड़ा तेल और एलपीजी आयात होता है। वर्तमान तनाव के कारण कई जहाज फंस गए हैं, जिनमें छह एलपीजी कैरियर, चार क्रूड ऑयल जहाज और एक एलएनजी वेसल शामिल हैं। सरकार ईरान और अन्य संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है।
विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि हम सभी जहाजों और उनके चालक दल के संपर्क में हैं। नाविकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। भारतीय नौसेना भी क्षेत्र में निगरानी रख रही है और आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए तैयार है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी 22 जहाजों को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाया जाए, ताकि ऊर्जा आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।