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भारत साइबेरिया में रेयर अर्थ मेटेरियल्स की खुदाई करेगा, चीन पर निर्भरता कम होगी

भारत ने साइबेरिया में स्थित टॉमटोर रेयर अर्थ मेटल्स डिपाजिट तक पहुंच प्राप्त करने के लिए रूस से प्रस्ताव स्वीकार किया है। इस कदम का उद्देश्य चीन पर निर्भरता को कम करना और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। भारतीय कंपनी आईआरईएल और रूस की रोसनेफ्ट के बीच बातचीत चल रही है, जिसमें नमूनों के विश्लेषण की योजना बनाई जा रही है। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अपनी रणनीति को मजबूत कर रहा है।
 

रूस का प्रस्ताव और भारत की पहल


रूस ने भारत को साखा गणराज्य में स्थित टॉमटोर रेयर अर्थ मेटल्स डिपाजिट तक पहुंच प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है। भारतीय सरकारी कंपनी इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (आईआरईएल) इस डिपाजिट के नमूनों को प्राप्त करने और उनके विश्लेषण के लिए रूस की कंपनी रोसनेफ्ट के साथ गोपनीय वार्ता कर रही है।


एक रिपोर्ट के अनुसार, डिपाजिट से प्राप्त सामग्री की प्रोसेसिंग रूस में की जाएगी, और इसके बाद इसे भारत भेजा जाएगा। वहां भारतीय विशेषज्ञ इसके खनिज संरचना का आकलन करेंगे ताकि सहयोग के बारे में निर्णय लिया जा सके।


टॉमटोर रेयर अर्थ मेटल्स डिपाजिट विश्व में रेयर अर्थ तत्वों के सबसे बड़े अविकसित स्रोतों में से एक है। यह वार्ता उस समय हो रही है जब भारत महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अपनी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और चीन पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है।


चीन का प्रभाव और भारत का रणनीतिक कदम

चीन वर्तमान में वैश्विक रेयर अर्थ उद्योग पर हावी है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 2025 में टॉमटोर प्रोजेक्ट का नियंत्रण रोसनेफ्ट को सौंपा जाएगा, क्योंकि रूस ने अपने घरेलू महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र को विकसित करने के प्रयासों को तेज कर दिया है।


भारत के साथ सहयोग बढ़ाना रूस के लिए एक रणनीतिक कदम है, जो संसाधन परियोजनाओं को विकसित करने और एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने का एक साधन है।