मध्य पूर्व में बढ़ती जंग की लपटें: लाल सागर पर खतरे की घंटी
जंग का दायरा बढ़ता जा रहा है
मध्य पूर्व में संघर्ष का दायरा तेजी से फैल रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकट के बीच, ईरान ने लाल सागर तक अपनी पहुंच स्थापित कर ली है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर हूती विद्रोहियों द्वारा समुद्री नाकेबंदी ने सऊदी अरब और पाकिस्तान सहित कई देशों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। होर्मुज के बंद होने के कारण, कई देशों ने लाल सागर को एक विकल्प के रूप में अपनाया है, जिससे सऊदी अरब, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात शुरू हुआ है.
मिस्र पर ड्रोन हमले का प्रभाव
अब जब जंग की आहट लाल सागर तक पहुंच गई है, तो यह वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। पहले यह संघर्ष केवल खाड़ी देशों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक सीमित था, लेकिन बुधवार रात मिस्र के एक बंदरगाह पर ड्रोन हमले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.
मिस्र को निशाना बनाने के कारण
मध्य पूर्व में अमेरिका का करीबी सहयोगी होने के नाते, मिस्र ने हाल के दिनों में सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाया है। इसके अलावा, सऊदी अरब और सोमालिया के साथ एक सैन्य गठबंधन बनाने की भी योजना बनाई जा रही है। पिछले पांच महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में मिस्र को कोई नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन अब उसके बंदरगाह पर ड्रोन हमले ने चिंता बढ़ा दी है.
ईरान का प्रॉक्सी नेटवर्क सक्रिय
यमन के हूती विद्रोही भी ईरान के प्रॉक्सी के रूप में कार्य कर रहे हैं। 20 जून से, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की हुई है। सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर भी हमले किए जा चुके हैं. यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का कहना है कि हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब में टोल लगाने की योजना बना रहे हैं, जैसा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर करना चाहता है.
लाल सागर पर बढ़ती चिंताएं
अगर हूती विद्रोही लाल सागर पर अपने हमलों को तेज करते हैं, तो यह न केवल सऊदी अरब के तेल निर्यात को प्रभावित करेगा, बल्कि भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया, नेपाल और पाकिस्तान जैसे एशियाई देशों को भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इससे ऊर्जा संकट भी उत्पन्न हो सकता है.
सऊदी अरब का नया गठबंधन
हूती विद्रोहियों की चुनौतियों का सामना करने के लिए, सऊदी अरब एक नया गठबंधन बना रहा है, जिसका मुख्यालय रियाद में होगा. सऊदी अरब ने कई देशों को इस गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है, जिसमें कुवैत, मिस्र, जिबूती और सूडान शामिल हैं.
लाल सागर में घटता ट्रैफिक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2023 से पहले बाब अल-मंदेब से रोजाना 70 से अधिक जहाज गुजरते थे, लेकिन हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद यह संख्या घटकर 11 रह गई है. विश्लेषकों का मानना है कि अगर लाल सागर में यातायात ठप हो गया, तो ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं.
भारत का व्यापार और लाल सागर
लाल सागर एशिया को यूरोप से जोड़ने का सबसे सस्ता और सुगम मार्ग है. भारत का यूरोप को होने वाला लगभग 80 प्रतिशत निर्यात लाल सागर पर निर्भर है. इससे यह स्पष्ट होता है कि लाल सागर का महत्व कितना अधिक है.
महंगाई और सप्लाई चेन पर प्रभाव
लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते भारत से जाने वाले जहाज 10,000 नॉटिकल मील की दूरी 25.5 दिनों में तय करते हैं. यदि लाल सागर को बाईपास किया गया, तो यह दूरी 13,500 नॉटिकल मील हो जाएगी और समय 34 दिनों का लगेगा, जिससे माल ढुलाई में देरी और लागत में वृद्धि होगी.
पाकिस्तान में ईंधन संकट की आशंका
पाकिस्तान अपनी जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत तेल खाड़ी देशों से खरीदता है. लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संघर्ष के कारण, पाकिस्तान ने सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह से लाल सागर के रास्ते निर्यात करना शुरू किया, जिससे लागत बढ़ गई और आपूर्ति में देरी हुई. अब हूती विद्रोहियों की नाकेबंदी ने इस रास्ते को भी बाधित कर दिया है.
पाकिस्तान का तेल खरीदने का विवरण
- संयुक्त अरब अमीरात: 50 से 56 प्रतिशत
- सऊदी अरब: 30 से 35 प्रतिशत
- कुवैत: लगभग 4 प्रतिशत