मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव: अमेरिका ने नागरिकों को निकासी की दी सलाह
मध्य पूर्व में तनाव की गंभीरता
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बना दिया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष ने एक बड़े क्षेत्रीय विवाद का रूप ले लिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अमेरिका को खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अपने राजनयिक मिशनों को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लेना पड़ा है और गैर-जरूरी कर्मचारियों को वापस बुलाने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही, अमेरिका ने अपने नागरिकों से एक दर्जन से अधिक मध्य पूर्वी देशों से निकलने की अपील की है।
अमेरिकी कर्मचारियों की निकासी
अमेरिकी विदेश विभाग ने बहरीन, जॉर्डन, कतर और कुवैत जैसे देशों में तैनात गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को तुरंत देश छोड़ने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा चिंताओं के कारण कई दूतावासों ने सामान्य कार्यों को रोक दिया है और केवल आवश्यक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। हालांकि, कई देशों के हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण लोगों को सुरक्षित निकालना चुनौतीपूर्ण हो गया है। कुछ अमेरिकी सैन्य ठिकानों की अनावश्यक यात्रा पर भी रोक लगा दी गई है।
कुवैत और सऊदी अरब में दूतावासों का बंद होना
कुवैत और सऊदी अरब में दूतावास बंद
कुवैत में अमेरिकी दूतावास ने क्षेत्रीय हालात के कारण अनिश्चितकाल के लिए अपने संचालन को बंद कर दिया है। सभी नियमित और आपातकालीन कांसुलर सेवाएं फिलहाल स्थगित कर दी गई हैं। इजरायल में अमेरिकी दूतावास ने भी स्पष्ट किया है कि वह नागरिकों को सीधे निकालने की स्थिति में नहीं है और लोगों को अपनी सुरक्षा की व्यवस्था स्वयं करने की सलाह दी गई है।
सऊदी अरब में ड्रोन हमला
रियाद में अमेरिकी दूतावास परिसर पर ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब में भी मिशन बंद कर दिया गया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दो ड्रोन हमलों से सीमित आग लगी और मामूली नुकसान हुआ। जेद्दा और धाहरान में मौजूद अमेरिकियों को घरों में सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है।
सैन्य कार्रवाइयों में वृद्धि
सैन्य कार्रवाइयों में तेजी
अमेरिका और इजरायल ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमलों की संख्या बढ़ा दी है। इसके जवाब में, ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों में वृद्धि की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि यह सैन्य अभियान चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है और आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। विदेश मंत्री ने संकेत दिया है कि हालात और भी कठिन हो सकते हैं।
मानवीय नुकसान में वृद्धि
बढ़ता मानवीय नुकसान
ईरान की राहत संस्था के अनुसार, हमलों की शुरुआत से अब तक ईरान में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। इजरायल में भी मिसाइल हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। लेबनान में इजरायली हमलों के बाद दर्जनों लोगों के मारे जाने की खबर है। अमेरिकी सेना ने कुवैत में छह सैनिकों की मौत की पुष्टि की है।
तनाव अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं है। लेबनान का संगठन हिज्बुल्लाह भी हमलों में सक्रिय हो गया है। इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान ने कतर और सऊदी अरब की ऊर्जा संरचनाओं पर भी हमले किए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया है। इससे वैश्विक तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ा है।